महाराष्ट्र: नंदोरी में हल्दी की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर कार्यशाला आयोजित
हल्दी की एकीकृत खेती, कीट नियंत्रण, मूल्यवर्धन और PMFME योजना की जानकारी देने के लिए विशेषज्ञों ने किसानों का मार्गदर्शन किया।
नंदोरी में आयोजित कार्यशाला के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को हल्दी फसल प्रबंधन की जानकारी दी।
महाराष्ट्र के नंदोरी में हल्दी की खेती को अधिक प्रभावी बनाने, फसल प्रबंधन, प्रसंस्करण और बाजार में बेहतर अवसरों से जोड़ने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला, प्रक्षेत्र भ्रमण विशेष कार्यक्रम और चर्चा सत्र का आयोजन किया गया। इसमें कृषि अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसानों को हल्दी की एकीकृत खेती, रोग एवं कीट नियंत्रण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात वृद्धि के लिए आवश्यक तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना (PMFME) और खेत बचाओ अभियान के तहत भी किसानों को जागरूक किया गया।
समुद्रपुर में आयोजित इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन हिंगोली जिले के वसमत स्थित मा. बालासाहेब ठाकरे हरिद्रा (हल्दी) अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्रौद्योगिकी समूह तथा उपविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय, हिंगणघाट की ओर से किया गया।
कार्यक्रम में उपविभागीय कृषि अधिकारी हिंगणघाट के स्वप्नील तोरणे, उपविभागीय कृषि अधिकारी वर्धा की वैष्णवी शिंदे, आत्मा वर्धा की परियोजना उपनिदेशक रानी गायकवाड़, तालुका कृषि अधिकारी समुद्रपुर की हर्षदा खेकारे और उपविभागीय कार्यालय हिंगणघाट के तकनीकी अधिकारी परमेश्वर घायतिडक प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। हल्दी अनुसंधान, फसल प्रबंधन, मूल्यवर्धन और प्रसंस्करण तकनीक के विशेषज्ञों ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया।
कार्यशाला में नागेश दत्तगोंडे ने सूखे जैसी परिस्थितियों में हल्दी की फसल का प्रबंधन और एकीकृत हल्दी खेती तकनीक की जानकारी दी। प्रिया गावंडे ने हल्दी की फसल में होने वाले रोगों और कीटों के प्रबंधन के उपाय बताए।
डॉ. सिद्धनाथ शेंडेकर ने हल्दी अनुसंधान केंद्र में चल रही अनुसंधान गतिविधियों की समीक्षा प्रस्तुत की और भौगोलिक संकेतक (जीआई) से संबंधित जानकारी दी। डॉ. प्रसाद गंगाखेडकर ने हल्दी के मूल्यवर्धन, प्रसंस्करण तकनीक, किसान उत्पादक समूहों और बाजार में उपलब्ध अवसरों के बारे में बताया।
डॉ. अजिंक्य कोतावार ने वायगांव हल्दी की ब्रांडिंग, मूल्यवर्धन, विपणन और निर्यात बढ़ाने के लिए एकीकृत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर मार्गदर्शन किया। कार्यशाला में हल्दी उत्पादन को खेती तक सीमित न रखते हुए प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से संबंधित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग योजना (PMFME) की जानकारी भी दी गई। किसानों को बताया गया कि इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग शुरू करने, मौजूदा उद्योगों का आधुनिकीकरण करने और कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण कर उनका मूल्यवर्धन करने के लिए उपलब्ध लाभों का उपयोग करने का अवसर मिलता है। इसके साथ ही योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेजों और लाभ प्राप्त करने के लिए की जाने वाली कार्रवाई के बारे में भी मार्गदर्शन किया गया।
खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को कृषि भूमि के संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, मृदा संरक्षण, भूमि कटाव रोकने और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के महत्व से अवगत कराया गया। इस दौरान कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ भूमि का स्वास्थ्य बनाए रखने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यशाला के बाद किसानों के खेतों का प्रक्षेत्र भ्रमण किया गया। इस दौरान हल्दी की फसल की वर्तमान स्थिति, फसल प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, एकीकृत खेती तकनीक और उत्पादन की गुणवत्ता सुधारने के उपायों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों का समाधान किया और आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करने का आह्वान किया।
इस कार्यशाला के माध्यम से किसानों को हल्दी की खेती से लेकर प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन तक की जानकारी मिली। साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कृषि आधारित सहायक उद्योग स्थापित करने के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाई गई।
कार्यक्रम में मंडल कृषि अधिकारी गिरड के धनविजय, समुद्रपुर के बांडेबूचे, समुद्रपुर के उपकृषि अधिकारी वाळके और देशमुख, गिरड के उपकृषि अधिकारी गायधने, उपविभागीय कृषि अधिकारी कार्यालय हिंगणघाट के उपकृषि अधिकारी गुजरकर, आरंभा/नंदोरी की कृषिसेवक विना राठोड, आत्मा के सहायक प्रौद्योगिकी प्रबंधक चांदेवार और हिवसे सहित बड़ी संख्या में हल्दी उत्पादक किसान उपस्थित रहे।