तस्वीर में मंच पर खड़े होकर माइक के सामने भाषण देते हुए वक्ता नजर आ रहे हैं।   

लातूर और धाराशिव जिलों में गंभीर जलसंकट के बीच गन्ने की फसल बचाने के लिए भूजल के कथित बड़े पैमाने पर हो रहे दोहन को तत्काल रोकने की मांग उठी है। शिवा लिंगायत युवक संगठन ने गन्ने के लिए जारी पानी के अत्यधिक उपसा पर कड़े प्रतिबंध लगाने और पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की है। संगठन के संस्थापक अध्यक्ष दयानंद पाटील ने इस संबंध में मुख्यमंत्री और लातूर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

ज्ञापन में कहा गया है कि इस वर्ष लातूर और धाराशिव जिलों में बेहद कम बारिश होने के कारण सूखे की स्थिति गंभीर हो गई है। कई क्षेत्रों में कुओं और बोरवेल के जलस्तर में भारी गिरावट आई है। इसके चलते नागरिकों को पीने के पानी के लिए बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संगठन का आरोप है कि ऐसी गंभीर स्थिति के बावजूद चीनी मिलों का गन्ना पेराई सीजन समाप्त होने के बाद भी खड़े गन्ने की फसल को बचाने के लिए भूगर्भीय जल का बड़े पैमाने पर दोहन जारी है। संगठन ने कहा है कि जनता के पीने के पानी की तुलना में गन्ने को प्राथमिकता नहीं दी जानी चाहिए और गन्ने के लिए पानी के उपसा पर तत्काल कड़े प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए।

ज्ञापन में मराठवाड़ा में गन्ने की खेती का क्षेत्र चरणबद्ध तरीके से कम करने के लिए स्थायी नीति बनाने की मांग भी की गई है। इसके साथ ही कम पानी में होने वाली दलहन और तिलहन फसलों को प्रोत्साहन देने तथा फसल विविधीकरण के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित करने की मांग की गई है।

जिले में गन्ने की खेती के लिए 100 प्रतिशत ड्रिप सिंचाई अनिवार्य करने और पानी की बर्बादी करने वाली पद्धतियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से की गई है।

दयानंद पाटील ने चेतावनी दी है कि पीने के पानी की समस्या के तत्काल समाधान के लिए प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए तो पूरे जिले में तीव्र जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। ऐसे में पेयजल संकट के बीच गन्ने के लिए भूजल दोहन का मुद्दा प्रशासन के सामने तत्काल कार्रवाई की मांग के साथ उठाया गया है।

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