शिक्षा से बनता है विवेक, संस्कारों से संवरता समाज: लातूर में गुणवंतों का सम्मान

लातूर में आषाढ़ी एकादशी पर आनंदवारी, गुणवंत विद्यार्थियों का सम्मान और दीपक चवणे व प्राचार्य केंद्रे का विशेष गौरव समारोह आयोजित हुआ।

Update: 2026-07-24 14:16 GMT

"शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को अन्याय के खिलाफ लड़ने की शक्ति, अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता और विवेकपूर्ण जीवन जीने की दिशा प्रदान करती है। शिक्षा से ज्ञान, कौशल, स्त्री-पुरुष समानता और समतावादी समाज का निर्माण होता है। इसलिए समाज के प्रत्येक वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर संस्कारित, विवेकवादी और समतावादी समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए।" यह प्रेरणादायी विचार विभागीय शिक्षा उपसंचालक दीपक चवणे ने व्यक्त किए।

लातूर स्थित राजमाता जिजामाता शैक्षणिक संकुल में आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर आयोजित 'आनंदवारी', नीट और जेईई परीक्षाओं में सफल विद्यार्थियों के सम्मान समारोह तथा संकुल के सचिव प्राचार्य डी. एन. केंद्रे के 70वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित अभिष्टचिंतन समारोह का आयोजन शुक्रवार को उत्साह, भक्तिभाव और शैक्षणिक प्रेरणा के वातावरण में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षणाधिकारी रोहिणी कुंभार, प्राथमिक शिक्षणाधिकारी प्रमोद पवार, शिवाजीनगर पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक संतोष पाटील, तहसीलदार सौदागर तांदळे, शिक्षण सहसंचालक संजय पंचगल्ले, नगरसेविका प्रेरणा होनराव और सामाजिक कार्यकर्ता उमेश निमकर प्रमुख रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थाध्यक्ष के. ए. जायेभाये ने की। मंच पर सचिव प्राचार्य डी. एन. केंद्रे, प्राचार्य संगमेश्वर केंद्रे, उपप्राचार्या कविता केंद्रे, मुख्याध्यापिका स्वाती केंद्रे, अश्विनी केंद्रे और प्रा. वैशाली केंद्रे उपस्थित थीं।

इस अवसर पर नीट और जेईई परीक्षाओं में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों का मान्यवरों के हाथों सम्मान किया गया। विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री और खाद्य सामग्री का वितरण कर उनका उत्साह बढ़ाया गया। स्टार प्रवाह वाहिनी के 'छोटे उस्ताद' प्रतियोगिता की विजेता और संकुल की छात्रा सायली टाक ने अभंग गायन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

इसके बाद पालखी पूजन कर आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर 'आनंदवारी' दिंडी का प्रस्थान किया गया। राजमाता जिजामाता विद्यालय से निकली यह दिंडी कोकाटे चौक, बोधेनगर और मंत्रीनगर मार्ग से होते हुए वापस विद्यालय पहुंची। दिंडी में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत पांडुरंग, विठ्ठल माऊली और रुक्मिणी की वेशभूषा आकर्षण का केंद्र रही। टाल-मृदंग की ध्वनि, अभंगों की स्वर लहरियों और विठ्ठल नाम के जयघोष से पूरा परिसर भक्तिमय हो गया। विद्यार्थियों की इस संस्कारमय भागीदारी ने उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित किया।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दीपक चवणे को संकुल की ओर से 'लातूर भूषण' पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया। वहीं शिक्षा क्षेत्र में चार दशक से अधिक समय तक दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्राचार्य डी. एन. केंद्रे का अभिष्टचिंतन समारोह भी उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया। उपस्थित अतिथियों ने उनके शैक्षणिक कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं दीं।

इस अवसर पर कांग्रेस नेता, पूर्व मंत्री तथा विधायक अमित देशमुख ने शुभकामना संदेश के माध्यम से प्राचार्य केंद्रे को जन्मदिन की बधाई दी और उनके स्वस्थ एवं दीर्घ जीवन के लिए शुभेच्छाएं व्यक्त कीं।

प्रास्ताविक में प्राचार्य डी. एन. केंद्रे ने संकुल की सफल शैक्षणिक यात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं और उद्देश्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन अब्दुल गालिब शेख ने किया।

इस कार्यक्रम में राजमाता जिजामाता विद्यालय, तुळजाभवानी विद्यालय और संगमेश्वर विद्यामंदिर के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, विद्यार्थी, अभिभावक और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। भक्ति, संस्कार, गुणवंत विद्यार्थियों के सम्मान और शिक्षा के महत्व को उजागर करने वाला यह समारोह उपस्थित लोगों के लिए यादगार अनुभव बन गया।

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