कोल्हापुर: कोगील बुद्रुक में सोयाबीन और धान की फसल का निरीक्षण
कृषि महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने फसलों के रोगों की पहचान कर किसानों को दिए एकात्मिक रोग प्रबंधन के वैज्ञानिक सुझाव।
खेत के सामने बैनर और पोस्टर थामे खड़े लोग दिखाई दे रहे हैं।
कोल्हापुर : विजय मोरबाळे
कोगील बुद्रुक में सोयाबीन और भात की फसलों में रोगों की स्थिति जानने के लिए कृषि विशेषज्ञों ने खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया। राजर्षी छत्रपति शाहू महाराज शासकीय कृषि महाविद्यालय, कोल्हापुर के रावे (RAWE) उपक्रम के तहत ‘फुले समृद्ध ग्राम’ कोगील बुद्रुक में यह पाहणी की गई। इस दौरान वनस्पति रोगशास्त्र विशेषज्ञ डॉ. आर. ए. करांडे ने किसानों की फसलों का निरीक्षण कर रोग प्रबंधन को लेकर मार्गदर्शन दिया।
सोयाबीन और भात की फसलों में पाए जाने वाले विभिन्न रोगों के लक्षण, रोगों का प्रकोप, उनसे बचाव के उपाय तथा एकात्मिक रोग प्रबंधन की पद्धतियों के बारे में डॉ. करांडे ने किसानों को विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसलों का नियमित निरीक्षण, रोगों का समय पर निदान और उचित समय पर सही उपाय करना आवश्यक है।
इस दौरे से किसानों को फसल संरक्षण के संबंध में उपयोगी तकनीकी मार्गदर्शन मिला। आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से यह उपक्रम संचालित किया गया।
इस अवसर पर रावे उपक्रम के तहत कृषिकन्या ऋषिक माने, गौरी खाटपे, संध्या पेटकर, प्राजक्ता पाटील, प्रांजल मांजरे और पूजा नाळे, वनस्पति रोगशास्त्र विभाग के स्नातकोत्तर विद्यार्थी विठ्ठल मिरगणे तथा किसान संभाजी पाटील और आनंदा पाटील उपस्थित रहे। कार्यक्रम को रावे समन्वयक डॉ. बी. टी. कोलगणे और कार्यक्रम अधिकारी डॉ. मयुरी खराडे का मार्गदर्शन मिला।
कोगील बुद्रुक में सोयाबीन और भात की फसलों की यह प्रत्यक्ष पाहणी किसानों को रोगों की पहचान, समय पर निदान और एकात्मिक रोग प्रबंधन की वैज्ञानिक पद्धतियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।