कोल्हापुर में बळीराजा योजना को मंजूरी, कागल-गडहिंग्लज-उत्तूर में बनेंगे 50 किमी शेतरस्ते
कोल्हापुर में मुख्यमंत्री बळीराजा योजना के पहले दो क्लस्टर मंजूर, 50 किमी शेतरस्तों को निधि मिलेगी और 7-8 नए क्लस्टर प्रस्तावित हैं।
तस्वीर में कागल स्थित शासकीय विश्रामगृह में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री हसन मुश्रीफ और अधिकारी नजर आ रहे हैं।
कोल्हापुर जिले में मुख्यमंत्री बळीराजा शेतरस्ते व पानंद योजना के तहत पहले दो क्लस्टर कागल, गडहिंग्लज और उत्तूर विधानसभा क्षेत्र में मंजूर किए गए हैं। इन क्लस्टर्स के माध्यम से 50 किलोमीटर लंबाई के शेतरस्ते और पानंद रस्तों को प्रशासनिक मंजूरी के साथ निधि उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी जानकारी वैद्यकीय शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने दी।
कागल स्थित शासकीय विश्रामगृह में मंत्री हसन मुश्रीफ की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री बळीराजा शेतरस्ते व पानंद योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में योजना के तहत मंजूर कार्यों और आगामी प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
मंजूर किए गए पहले क्लस्टर में कागल तालुका के 25 किलोमीटर शेतरस्ते और पानंद रस्तों को शामिल किया गया है। वहीं, दूसरे क्लस्टर में गडहिंग्लज तालुका के गिजवणे जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र के 12.5 किलोमीटर और आजरा तालुका के उत्तूर जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्र के 12.5 किलोमीटर, कुल 25 किलोमीटर लंबाई के रस्तों का समावेश किया गया है।
मंत्री हसन मुश्रीफ ने बताया कि कागल, गडहिंग्लज और उत्तूर विधानसभा क्षेत्र में योजना के तहत अभी और 7 से 8 क्लस्टर मंजूर करवाने के लिए शासन स्तर पर प्रयास जारी हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 25 किलोमीटर शेतरस्ते और पानंद रस्तों को शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से किसानों को खेतों तक वर्षभर सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। शेतरस्ते और पानंद रस्तों के विकास से कृषि कार्यों में आने-जाने की सुविधा बेहतर होगी।
समीक्षा बैठक में उपविभागीय अधिकारी प्रसाद चौगुले, तहसीलदार अमरदीप वाकडे, गटविकास अधिकारी कुलदीप बोंगे, सुभाष सावंत, संतोष नागटिळक, उपविभागीय पुलिस अधिकारी सतीश होडगर सहित संबंधित अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समिति सदस्य उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री बळीराजा शेतरस्ते व पानंद योजना के तहत कोल्हापुर जिले में मंजूर हुए इन पहले दो क्लस्टर्स से ग्रामीण क्षेत्रों के शेतरस्तों के विकास को गति मिलेगी और किसानों के लिए खेतों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में कार्य आगे बढ़ेगा।