महाराष्ट्र में ठेकेदारों के 86 हजार करोड़ रुपये अटके, भुगतान के लिए महासंघ आक्रामक
महाराष्ट्र के जलगांव में ठेकेदारों के 86 हजार करोड़ रुपये के भुगतान दो वर्षों से लंबित होने का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर तत्काल भुगतान, आर्थिक राहत और उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है।
जलगांव में महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ के प्रतिनिधि जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर मीडिया को संबोधित करते हुए 86 हजार करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में ठेकेदारों का करीब 86 हजार करोड़ रुपये का भुगतान पिछले दो वर्षों से लंबित होने का मामला सामने आया है। बकाया राशि नहीं मिलने से ठेकेदार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ ने आक्रामक रुख अपनाते हुए लंबित भुगतान तत्काल जारी करने और ठेकेदारों की समस्याओं के समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की मांग की है। महासंघ ने इस संबंध में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में बताया गया है कि सार्वजनिक निर्माण विभाग, जलजीवन मिशन, आदिवासी विकास, पर्यटन, ग्रामीण विकास और जल संसाधन विभाग सहित विभिन्न विभागों के ठेकेदारों के लगभग 86 हजार करोड़ रुपये के भुगतान पिछले दो वर्षों से लंबित हैं। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण ठेकेदारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
महासंघ ने यह भी उल्लेख किया है कि बकाया राशि नहीं मिलने के कारण कुछ ठेकेदारों ने चरम कदम उठाए हैं। भुगतान में लगातार हो रही देरी और शासन की नीतियों को लेकर ठेकेदारों में तीव्र नाराजगी है। इस स्थिति के कारण ठेकेदारों की आर्थिक समस्याओं का समाधान करना एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।
इस पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ ने शासन से तत्काल निर्णय लेकर लंबित देयकों का भुगतान करने और ठेकेदारों को आर्थिक राहत देने की मांग की है। साथ ही, ठेकेदारों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर जोर दिया गया है।
महासंघ के जिलाध्यक्ष विलास पाटील ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से इन मांगों को उठाया है। इस मामले में महाराष्ट्र राज्य ठेकेदार महासंघ के कार्याध्यक्ष प्रमोद नेमाडे और निलेश पाटील के बयान भी निर्धारित समाचार सामग्री में शामिल हैं। लंबित भुगतान, ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति और समस्याओं के समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति की मांग इस पूरे मामले के प्रमुख बिंदु हैं।