मुंबई में आयोजित नवरात्रि अनुष्ठान के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करतीं साध्वियां और उपस्थित गणमान्य।

मुंबई। नवरात्रि के नौ दिवसीय अनुष्ठान में जप, तप और ध्यान के माध्यम से समाधि की प्राप्ति का संदेश दिया गया। नौवें दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि जीवन में सहनशीलता बढ़ने के साथ समाधि बढ़ती है और आधि, व्याधि व उपाधि का प्रभाव क्षीण होने लगता है। जो व्यक्ति समाधि के सुख का अनुभव कर लेता है, उसके लिए सुखों का द्वार सदा के लिए खुल जाता है।

मुख्य वक्ता साध्वी योगक्षेमप्रभा ने कहा कि मनुष्य मानसिक दुःख से दुखी है और शारीरिक व्याधियों से पीड़ित है, लेकिन उपाधियों से वह इससे भी अधिक व्यथित है। ध्यान और जप के प्रयोग व्यक्ति को आधि, व्याधि और उपाधियों से मुक्त कर समाधि के जगत में प्रवेश करवाते हैं। उन्होंने कहा कि नौ दिवसीय अनुष्ठान में ऐसे अनेक रहस्य उजागर हुए हैं, जो जीवन को आनंदमय बनाने वाले हैं। प्रतिदिन निर्धारित समय पर इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति अनुष्ठान के प्रति उनकी निष्ठा का प्रतीक है।


नवरात्रि तपयोग में साध्वियों के साथ अनेक भाई-बहन भी जुड़े। इस दौरान दस प्रत्याख्यान, आयंबिल, निरंतर एकासन और उपवास का क्रम प्रेरणादायी रहा। कांता अम्बालाल कोठारी ने ग्यारह दिन और विमल सुभाष चंडालिया ने नौ दिवस तक पूर्ण निराहार तप स्वीकार किया।

सभा परिवार की ओर से लक्ष्मण कोठारी ने दोनों तपस्वियों के तप की अनुमोदना की। साथ ही, भवन में इस वर्ष आयोजित अपूर्व नवरात्रि अनुष्ठान की भूरि-भूरि सराहना की। साध्वी योगप्रभा, साध्वी लावण्याप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितप्रभा और साध्वी मधुरप्रभा ने संगीत प्रस्तुतियों से वातावरण को तपोमय बना दिया।

इस अवसर पर वनिता चंडालिया, सुभाष चंडालिया, मूलचंद लोढ़ा और पुखराज बाफना ने अठम तप का संकल्प लेकर तपस्वियों का भावपूर्ण अभिनंदन किया। नौ दिवसीय नवरात्रि अनुष्ठान में ध्यान, जप, तप और विभिन्न तपस्याओं के माध्यम से श्रद्धालुओं ने साधना के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की।

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