तस्वीर में दिख रही प्रदर्शनी में लोग पुराने सिक्के देख रहे हैं।

इतिहास को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए वास्तविक वस्तुओं के माध्यम से समझने और विद्यार्थियों को 10वीं के बाद शिक्षा व करियर की विभिन्न संभावनाओं की जानकारी देने के उद्देश्य से श्री मौनी विद्यापीठ संचलित आचार्य जावडेकर शिक्षणशास्त्र महाविद्यालय, गारगोटी की अंतरवासिता चरण क्रमांक दो, समूह क्रमांक तीन की ओर से श्रीराम हाईस्कूल, गंगापुर में पुराने सिक्कों की अनोखी प्रदर्शनी और शैक्षणिक एवं करियर मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीराम हाईस्कूल के प्रधानाचार्य ए. ए. गुरव ने की। मुख्य अतिथि बी. जी. देवळी ने अपने व्यक्तिगत संग्रह से विभिन्न कालखंडों के पुराने सिक्के विद्यार्थियों के अवलोकन के लिए प्रदर्शित किए। उन्होंने विद्यार्थियों को इन सिक्कों की बनावट, उन पर अंकित चिह्न, अक्षर, प्रतिमाएं, धातु, आकार-प्रकार के साथ तत्कालीन राजसत्ताओं और आर्थिक लेन-देन की जानकारी प्रत्यक्ष उदाहरणों के माध्यम से दी।

विद्यार्थियों को बताया गया कि पुराने सिक्कों को केवल मुद्रा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उनमें संबंधित काल की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों की झलक भी दिखाई देती है।

विभिन्न राजसत्ताओं के दौरान मुद्रा प्रणाली में हुए बदलाव, सिक्कों पर अंकित राजचिह्न और ऐतिहासिक निशानों ने विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति जिज्ञासा पैदा की। किताबों में पढ़े गए इतिहास को वास्तविक सिक्कों के माध्यम से समझने का अवसर मिलने के कारण प्रदर्शनी विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

इस अवसर पर विद्यार्थियों को 10वीं के बाद की शिक्षा और करियर नियोजन के विषय में भी मार्गदर्शन दिया गया। 10वीं के बाद कला, वाणिज्य, विज्ञान, व्यावसायिक पाठ्यक्रम, कौशल आधारित शिक्षा तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से उपलब्ध अवसरों की जानकारी विद्यार्थियों को दी गई।

विद्यार्थियों को अपनी रुचि, क्षमताओं, कौशल और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक शाखा का चयन करने की सलाह दी गई। इसके साथ ही अध्ययन की योजना, समय प्रबंधन, नियमित अभ्यास, पुनरावृत्ति का महत्व, प्रश्नपत्रिका का अध्ययन और परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन के बारे में भी मार्गदर्शन किया गया।

प्रश्नपत्रिका प्रभावी ढंग से कैसे हल की जाए, प्रश्नों का सही क्रम कैसे तय किया जाए, उत्तर लिखते समय मुद्देसूदता कैसे बनाए रखी जाए, आवश्यक स्थानों पर आकृतियों और तालिकाओं का उपयोग कैसे किया जाए तथा परीक्षा में होने वाली गलतियों से कैसे बचा जाए, इसकी जानकारी भी विद्यार्थियों को दी गई।

विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में रखे विभिन्न सिक्कों को उत्सुकता से देखा और उनके बारे में सवाल पूछे। सिक्कों के इतिहास के साथ संग्रह की रुचि, वस्तुओं के संरक्षण और ऐतिहासिक विरासत के संवर्धन को लेकर भी विद्यार्थियों में जागरूकता पैदा हुई।

कार्यक्रम में समूह मार्गदर्शक प्रो. डॉ. आर. के. शेळके, छात्र प्रधानाचार्या शरयू वास्कर, छात्र उपप्रधानाचार्य ऋषिकेश माळी, समूह के सभी प्रशिक्षु, विद्यालय के संस्थापक, शिक्षकगण तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।

पाठ्यक्रम के साथ विद्यार्थियों को इतिहास का प्रत्यक्ष अनुभव और भविष्य की शैक्षणिक यात्रा के लिए उचित दिशा देने वाला यह उपक्रम रहा। पुराने सिक्कों की प्रदर्शनी, ऐतिहासिक जानकारी और करियर मार्गदर्शन के संगम वाले इस कार्यक्रम की उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सराहना की।

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