कर्तव्य के अनुरूप आचरण ही सच्चा धर्म: कुन्हाड़ी चातुर्मास में मुनि विवर्धनसागर का प्रेरक संदेश

कोटा के कुन्हाड़ी स्थित श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास के दौरान मुनि विवर्धनसागर ने कर्तव्य, संयम, अहिंसा और धर्म की मर्यादाओं पर महत्वपूर्ण संदेश दिया।

Update: 2026-08-04 08:03 GMT

रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में 'विराग वर्धन वर्षायोग-2026' के अंतर्गत समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के सुशिष्य एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ससंघ (6 पिच्छी) का भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में जारी है। आयोजन अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य जिस भी अवस्था या दायित्व में हो, उसे उसी के अनुरूप अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गृहस्थ, भाई, पुत्र अथवा मुनि बनने के साथ जीवन की क्रियाएं और जिम्मेदारियां बदल जाती हैं, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने वर्तमान पद और धर्म के अनुरूप आचरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्तव्य, करुणा और संयम से ही जीवन सार्थक बनता है।

मुनिश्री ने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए केवल बाहरी आडंबर पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि भावों की पवित्रता और अहिंसा का पालन सबसे अधिक आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे किसी भी जीव को कष्ट या हानि पहुंचे। उनके अनुसार भावों की शुद्धता के बिना धर्म साधना पूर्ण नहीं मानी जा सकती।

पूजन-पद्धति के संबंध में उन्होंने धार्मिक मर्यादाओं के पालन पर विशेष बल देते हुए कहा कि वेदी पर केवल निर्धारित धार्मिक क्रियाएं ही की जानी चाहिए और शास्त्रोक्त मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मर्यादाओं की अनदेखी से अनजाने में भी जीवों की बाधा का कारण बनकर कर्मों का बंध हो सकता है।

कार्यक्रम में मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं महामंत्री पंकज खटोड सहित सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, बसंत दोषी, निर्मल अजमेरा, प्रकाश पहाड़िया, मनोज निर्खी, सुरेश देईवाले, चंद्रप्रकाश बंसल, विनोद सरसोप, मोनू बाकलीवाल, नितेश खटोड़, सुरेंद्र पहाड़िया, पारस गोधा, अशोक पांडिया तथा चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल के सदस्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। चातुर्मास के दौरान आयोजित प्रवचनों में धर्म, संयम, अहिंसा और कर्तव्य पालन का संदेश श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है।

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