जयपुर में करणी सेना के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज की दुष्यंत सिंह गहलोत ने की निंदा, संवाद से समाधान की अपील
जयपुर में करणी सेना के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल की दुष्यंत सिंह गहलोत ने निंदा की। सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
तस्वीर में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश मीडिया प्रवक्ता दुष्यंत सिंह गहलोत नजर आ रहे हैं।
जयपुर में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना की रैली के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वाटर कैनन के इस्तेमाल की श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदेश मीडिया प्रवक्ता दुष्यंत सिंह गहलोत ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बताते हुए सरकार और प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
जारी प्रेस बयान में दुष्यंत सिंह गहलोत ने कहा कि यूजीसी रोल बैक सहित विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे करणी सेना के कार्यकर्ताओं, सर्व समाज के लोगों और आम नागरिकों पर बल प्रयोग किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य प्रदर्शनकारियों पर भी वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया, जो उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से रखने का अधिकार है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को बल प्रयोग के बजाय संबंधित पक्षों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, ताकि सामाजिक सौहार्द और कानून-व्यवस्था दोनों बनाए रखे जा सकें।
प्रदेश मीडिया प्रवक्ता दुष्यंत सिंह गहलोत ने आरोप लगाया कि सरकार जनभावनाओं की अनदेखी कर रही है, जिससे समाज में असंतोष का वातावरण बन रहा है। उन्होंने कहा कि करणी सेना ने पूर्व में भाजपा का समर्थन किया है, लेकिन यदि राजपूत समाज और सर्व समाज की भावनाओं की लगातार उपेक्षा की गई तथा जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, तो समाज भविष्य में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए राजनीतिक निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होगा।
दुष्यंत सिंह गहलोत ने सरकार से अपील की कि जनहित से जुड़े सभी मुद्दों पर संबंधित पक्षों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित कर शीघ्र समाधान निकाला जाए, ताकि समाज में विश्वास, शांति और सौहार्द का वातावरण बना रहे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद ही विवादों के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है और सरकार को इसी दिशा में पहल करनी चाहिए।