तस्वीर में राजस्थान के नक्शे पर आरजीएचएस योजना का लोगो दिखाई दे रहा है।

राजस्थान सरकार की राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में निजी अस्पतालों और डॉक्टरों की मनमानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन से हर महीने RGHS मद में राशि की कटौती होने के बावजूद लाभार्थियों को उपचार के लिए अस्पतालों में अलग-अलग स्वघोषित नियमों का सामना करना पड़ रहा है।

कोटा, 3 सितंबर। राजस्थान सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) शुरू की है, लेकिन निजी अस्पतालों में कथित मनमानी के कारण योजना के लाभार्थी परेशान हो रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन से हर महीने नियमित रूप से RGHS मद में राशि की कटौती होती है, इसके बावजूद अस्पतालों में इलाज और दवा लेने के लिए अलग-अलग नियम बताए जा रहे हैं।

लाभार्थियों के अनुसार राज्य सरकार या चिकित्सा विभाग की ओर से ऐसे कोई नियम निर्धारित नहीं किए गए हैं, फिर भी कई निजी चिकित्सालयों और डॉक्टरों ने अपनी सुविधा के अनुसार RGHS मरीजों के लिए नियम बना रखे हैं। कहीं रविवार को RGHS सेवा बंद रखी जाती है, तो कहीं डॉक्टर पहले 10 कैश मरीजों को देखने के बाद एक RGHS मरीज को देखते हैं।

अस्पतालों में RGHS मरीजों के लिए समय सीमा को लेकर भी अलग-अलग पाबंदियां सामने आ रही हैं। कहीं दोपहर 12 बजे के बाद RGHS की पर्ची नहीं काटी जाती। वहीं, कहीं दिन में दवा कैश में लेने की मजबूरी बताई जाती है और RGHS के तहत दवा लेने के लिए शाम 4 बजे के बाद आने को कहा जाता है। कुछ अस्पतालों में प्रतिदिन केवल 10 RGHS मरीजों को ही देखने की सीमा तय कर रखी गई है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिलने पर वापस लौटना पड़ता है।

RGHS योजना के तहत राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारी और पेंशनर हर महीने अपने वेतन से निर्धारित राशि का भुगतान करते हैं। इसके बावजूद उपचार की जरूरत के समय निजी अस्पतालों के इन स्वघोषित नियमों के कारण लाभार्थियों को अपने अधिकार का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। इससे मरीजों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और योजना के मूल उद्देश्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पीड़ित कर्मचारियों और लाभार्थी संगठनों ने राज्य सरकार एवं RGHS के उच्च अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि RGHS के तहत पंजीकृत अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए स्पष्ट एवं सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। नियमों का उल्लंघन करने और मरीजों को परेशान करने वाले निजी अस्पतालों का पैनल रद्द करने के साथ उन पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि कर्मचारियों और पेंशनरों को RGHS के तहत उनका हक सुगमता से मिल सके।

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