रामधाम सेवा आश्रम में वैदिक शिक्षा का शुभारंभ, नवबटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न
कोटा के रामधाम सेवा आश्रम में नवबटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न, संतों के सानिध्य में वैदिक शिक्षा की नई शुरुआत हुई।
तस्वीर में श्री रामधाम सेवा आश्रम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान यज्ञोपवीत संस्कार के अवसर पर बैठे नवबटुक और उपस्थित संत-महात्मा नजर आ रहे हैं।
श्री रामधाम सेवा आश्रम ट्रस्ट में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को भक्तमाल वेद विद्यालय में प्रवेश लेने वाले नवबटुकों का यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार वैदिक विधि-विधान और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नवदीक्षित बटुकों ने वैदिक शिक्षा और सनातन संस्कृति की साधना का संकल्प लिया।
रामधाम सेवा आश्रम ट्रस्ट के व्यवस्थापक श्री लक्ष्मणदास जी महाराज ने बताया कि यह संस्कार बड़ा भक्तमाल अयोध्याजी के पीठाधीश्वर स्वामी श्री अवधेशाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में हाड़ौती अंचल के अनेक संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वैदिक मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच नवबटुकों ने यज्ञोपवीत धारण किया। इस दौरान संतों ने विद्यार्थियों को धर्म, संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के आदर्शों पर चलने का संदेश देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
कार्यक्रम में श्री बृजेंद्र दास जी महाराज, श्री कमल दास जी महाराज, श्री महेंद्र दास जी महाराज तथा नौताड़ा धरावन के संत श्री लक्ष्मण दास जी महाराज सहित अनेक संत-महात्मा उपस्थित रहे।
रामधाम सेवा आश्रम के व्यवस्थापक श्री लक्ष्मणदास जी महाराज ने बताया कि भक्तमाल वेद विद्यालय की परंपरा के अनुसार प्रत्येक वर्ष प्रवेश लेने वाले नए विद्यार्थियों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया जाता है। इसके बाद ही उन्हें वेद, कर्मकांड, गायत्री साधना, संध्या-वंदन तथा भारतीय ऋषि परंपरा पर आधारित आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा प्रदान की जाती है।
बड़ा भक्तमाल अयोध्याजी के पीठाधीश्वर स्वामी श्री अवधेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि यह संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान, अनुशासन और चरित्र निर्माण की औपचारिक शुरुआत का प्रतीक है। यज्ञोपवीत संस्कार के साथ नवबटुकों के लिए वैदिक अध्ययन की नई यात्रा का शुभारंभ हुआ।