गुरु पूर्णिमा पर विशुद्धसागर महाराज का पूजन-अभिषेक, चातुर्मास स्थल में गूंजा गुरु भक्ति का स्वर

कोटा के चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में गुरु पूर्णिमा पर विशुद्धसागर महाराज का पूजन-अभिषेक हुआ, मुनि विवर्धनसागर ने गुरु महिमा बताई।

Update: 2026-07-30 10:44 GMT

तस्वीर में मुनिश्री विवर्धनसागर जी महाराज कुन्हाड़ी के चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान माइक पर प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।

रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने समाधिस्थ गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के सुशिष्य एवं पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज का विधि-विधान से पूजन एवं अभिषेक कर गुरु चरणों में श्रद्धा अर्पित की।

गुरु पूर्णिमा के आयोजन का संचालन श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान पूरा वातावरण गुरु भक्ति से ओतप्रोत रहा। श्रावक-श्राविकाओं ने “गुरुवर ओ गुरुसा तेरो चेलो भक्त बनूं...” और “सावन की ऋतु के अवसर आया अवसर भक्ति का...” जैसे भक्तिमय गीतों की प्रस्तुति देकर गुरु के प्रति अपनी आस्था और समर्पण व्यक्त किया।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए गणधर मुनि श्री 108 विवर्धनसागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म में 24 तीर्थंकर हुए हैं और भगवान महावीर 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर हैं। उन्होंने बताया कि आषाढ़ पूर्णिमा के पावन दिवस पर भगवान महावीर ने इंद्रभूति गौतम को अपना प्रथम शिष्य स्वीकार कर उन्हें दीक्षित किया था। इसी ऐतिहासिक घटना के कारण जैन समाज गुरु पूर्णिमा को विशेष श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ मनाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान महावीर गुरु स्वरूप में प्राप्त हुए थे।

मुनिश्री विवर्धनसागर जी महाराज ने कहा कि गुरु के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हुए पिच्छी और कमंडल धारण करने वाले संयमी साधु को ही गुरु मानना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से गुरु भक्ति, वैयावृत्ति और आज्ञापालन को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। मुनिश्री ने कामना व्यक्त की कि गुरुजनों की साधना अंतिम श्वास तक निरंतर चलती रहे और वे संलेखना पूर्वक समाधिमरण को प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि यही प्रत्येक श्रद्धालु की मंगल भावना होनी चाहिए।

गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम में सकल दिगम्बर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर कोषाध्यक्ष ताराचंद बडला, बसंत दोषी, निर्मल अजमेरा, प्रकाश पहाड़िया, मनोज निर्खी, सुरेश देईवाले, चंद्रप्रकाश बंसल, विनोद सरसोप, मोनू बाकलीवाल, नितेश खटोड़, सुरेंद्र पहाड़िया, पारस गोधा, अशोक पांडिया तथा चंद्रप्रभु दिगम्बर नवयुवक मंडल के सदस्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन चातुर्मास स्थल पर धार्मिक आस्था और गुरु भक्ति के भावों के साथ संपन्न हुआ।

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