राजस्थान में पहली बार मुनिश्री योगसागर महाराज का वर्षायोग, कोटा बनेगा गुरुभक्ति का केंद्र
कोटा में पहली बार मुनिश्री 108 योगसागर महाराज ससंघ का वर्षायोग, 9 अगस्त को नसियां जी में होगा भव्य कलश स्थापना महोत्सव।
तस्वीर में दिख रही सभा में हाथ जोड़कर और श्रीफल (नारियल) लेकर बैठे जैन समाज के श्रद्धालु कोटा के मंदिर परिसर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं।
कोटा के श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान, विश्व शांति हवन (यज्ञ) एवं जिनवाणी शोभायात्रा के दौरान राजस्थान के आध्यात्मिक इतिहास में महत्वपूर्ण अवसर जुड़ गया। परम पूज्य राष्ट्रसंत, युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के सुयोग्य शिष्य, ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन वर्षायोग (चातुर्मास) की घोषणा होते ही पूरा मंदिर परिसर "आचार्य श्री विद्यासागर महाराज की जय", "मुनिश्री योगसागर महाराज की जय" एवं "जय जिनेन्द्र" के उद्घोषों से गूंज उठा।
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व से पहले शिक्षा नगरी कोटा में हुए इस ऐतिहासिक अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया। गुरु भक्ति, साधना और धर्मआराधना का अद्भुत संगम अब गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कोटा में देखने को मिलेगा।
समिति अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं निदेशक हुकम जैन 'काका' ने बताया कि यह अवसर केवल कोटा ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने बताया कि पूज्य मुनिश्री का अधिकांश वर्षायोग अब तक मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में हुआ है, जबकि राजस्थान की पुण्यभूमि पर उनका यह पहला वर्षायोग होगा। यह सम्पूर्ण प्रदेश के आध्यात्मिक उत्थान, धर्मप्रभावना और पुण्योदय का शुभ संकेत है।
समिति के अनुसार रविवार, 9 अगस्त 2026 को प्रातः 8:00 बजे श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं गुरुवंदना से होगा। इसके बाद पूजन, कलश स्थापना, मंगल आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान सम्पन्न होंगे। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह आयोजन जिनशासन की प्रभावना और गुरुभक्ति का ऐतिहासिक पर्व बनेगा।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु युगश्रेष्ठ संतशिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के प्रेरणादायी वचनों का भावपूर्ण स्मरण करेंगे। "हमारे ज्ञानसागर महाराज कहते थे— भले ही मैं दूर हूँ, लेकिन अपने भावों को तो निकट तक भेजता रहता हूँ।" इन प्रेरक वचनों ने श्रद्धालुओं में गुरु-भक्ति, आत्मसंयम और साधना के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।
अपने मंगल प्रवचन में पूज्य मुनिश्री योगसागर जी महाराज ने वर्षायोग की आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक महत्ता बताते हुए कहा कि वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की उत्पत्ति अधिक होती है। अहिंसा की सर्वोच्च साधना के लिए दिगम्बर मुनि चार माह तक एक ही स्थान पर रहकर तप, ध्यान, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन करते हैं।
मुनिश्री ने कहा कि साधु किसी नगर या व्यक्ति से नहीं, बल्कि भगवान की आज्ञा से बंधते हैं। चातुर्मास केवल एक स्थान पर निवास करना नहीं, बल्कि करुणा, दया, आत्मशुद्धि और कर्मनिर्जरा की महान साधना है। उन्होंने कहा कि वास्तविक अहिंसा केवल दूसरों पर दया करना नहीं, बल्कि अपने भीतर के राग, द्वेष और मोह का क्षय करना भी है। जब मनुष्य स्वयं पर दया करना सीख जाता है, तभी वह मुक्ति के वास्तविक मार्ग पर आगे बढ़ता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से चार माह के इस आध्यात्मिक अवसर का सदुपयोग करते हुए प्रतिमा-व्रत, संयम, स्वाध्याय एवं धर्मानुशासन अपनाकर जीवन को सार्थक बनाने का आह्वान किया।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि वीतराग संतों का वर्षायोग जिस स्थान पर होता है, वह भूमि तीर्थ के समान पवित्र हो जाती है। गुरुवर का सान्निध्य समाज में संयम, सदाचार, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक जागरण का वातावरण तैयार करता है।
उन्होंने आगम वचन "विणओ मोक्खद्वारं" (विनय ही मोक्ष का द्वार है) का स्मरण कराते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा, विनय एवं सेवा आत्मकल्याण का प्रथम सोपान है।
मुख्य संयोजक धर्मचंद जैन धानोप्या एवं अर्चना (रानी) सर्राफ ने बताया कि श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान, विश्व शांति हवन (यज्ञ), जिनवाणी शोभायात्रा तथा पूर्णाहुति श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुई। विधानाचार्य अभिषेक भैया जी एवं शुभम भैया जी के निर्देशन में सभी धार्मिक अनुष्ठान विधिपूर्वक सम्पन्न हुए। इस दौरान सम्पूर्ण परिसर णमोकार महामंत्र, जैन भक्ति गीतों एवं जयघोषों से गुंजायमान रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आत्मकल्याण और विश्वशांति की मंगलकामना के साथ सहभागिता की।
कार्यक्रम में शांतिधारा राजेन्द्र, हुकम जैन 'काका' हरसोरा परिवार, महावीर मित्तल तथा श्रीमती सुशीला–विवेक ठोरा परिवार द्वारा की गई। चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र भेंट राजेन्द्र–सरोज बागड़िया परिवार (सरोला) एवं विनोद कामनी गर्ग परिवार की ओर से किया गया। भक्तामर विधान महावीर मित्तल परिवार एवं प्रमोद बागड़िया परिवार द्वारा सम्पन्न कराया गया।
प्रशासनिक मंत्री पारस दोराया ने बताया कि चतुर्दशी होने के कारण आज आहारचर्या सम्पन्न नहीं हो सकी।
पुण्योदय आयोजन समिति एवं श्री सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, कोटा ने समस्त समाज से 9 अगस्त को आयोजित भव्य वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव में सपरिवार सहभागी बनने का आग्रह किया है। समिति ने कहा कि यह आयोजन गुरुभक्ति, जिनशासन की प्रभावना, समाज की एकता और अनन्त पुण्य अर्जन का दुर्लभ अवसर है।
श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी में 9 अगस्त 2026 को प्रातः 8:00 बजे होने वाला वर्षायोग कलश स्थापना महोत्सव अब कोटा के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण आयोजन के रूप में देखा जा रहा है।