श्री मथुराधीश मंदिर में सजा ‘बैंगन दशमी’ का मनोरथ, प्रभु को चढ़ा विशेष भोग
कोटा के श्री मथुराधीश मंदिर में बैंगन दशमी का मनोरथ हुआ संपन्न, प्रभु को चढ़ाए गए विशेष बैंगन व्यंजन और शुरू होंगे चतुर्मास नियम।
तस्वीर में श्री मथुराधीश मंदिर परिसर में प्रभु के लिए अर्पित बैंगन के विभिन्न व्यंजन और भोग सामग्री दिखाई दे रही है।
पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ श्री बड़े मथुराधीश मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर शुक्रवार को पारंपरिक ‘बैंगन दशमी’ का मनोरथ श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रभु श्री मथुराधीश जी को अनसखड़ी और सखड़ी भोग में बैंगन से तैयार विभिन्न विशेष व्यंजन अर्पित किए गए।
प्रथम पीठ के युवराज गोस्वामी मिलन बावा के पावन सानिध्य में मंदिर के सेवाधारियों एवं मुखियाजी ने प्रभु श्री मथुराधीश जी का अलौकिक श्रृंगार किया और सभी सेवा-क्रम विधि-विधान से पूर्ण किए। इस दौरान प्रभु की विशेष पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश में सुख, शांति तथा समृद्धि की मंगल कामना की गई।
‘बैंगन दशमी’ के अवसर पर प्रभु को अनसखड़ी और सखड़ी भोग में बैंगन के अनूठे व्यंजनों का आरोगन कराया गया। अनसखड़ी भोग में बैंगन के गुंजा (समोसे), स्वादिष्ट पकौड़े और विभिन्न प्रकार की सब्जियां अर्पित की गईं। वहीं सखड़ी सेवा के अंतर्गत राजभोग में बैंगन भात, बैंगन की कढ़ी, बैंगन के पकौड़े, तले हुए चकते तथा आखा (भरवां) बैंगन की सब्जी प्रभु के समक्ष धराई गई।
गोस्वामी मिलन बावा ने बताया कि पुष्टिमार्गीय वैष्णव परंपरा में ‘बैंगन दशमी’ का विशेष आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व है। मान्यता के अनुसार, इसके अगले दिन देवशयनी एकादशी से लेकर देव प्रबोधिनी एकादशी तक चार महीने (चतुर्मास) के लिए पुष्टिमार्गीय मंदिरों एवं वैष्णव परिवारों में बैंगन का सेवन पूर्णतः वर्जित रहता है। ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य नियमों के पालन की इसी प्राचीन परंपरा के तहत चतुर्मास प्रारंभ होने से एक दिन पूर्व प्रभु को बैंगन के विभिन्न व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
प्रभु के इस विशेष मनोरथ और मनमोहक झांकी के दर्शन के लिए दिनभर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। पाटनपोल स्थित संपूर्ण प्रांगण "जय-जय श्रीराधे" और "श्री मथुराधीश प्रभु" के भक्तिमय जयकारों से गूंज उठा। दूर-दराज से पहुंचे वैष्णव जनों ने प्रभु के अलौकिक दर्शन कर आनंद प्राप्त किया।
गोस्वामी मिलन बावा ने बताया कि शनिवार को पाटनपोल स्थित श्री मथुराधीश मंदिर में देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी। इसके साथ ही पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार चतुर्मास के विशेष नियम-संयम प्रारंभ हो जाएंगे। वैष्णव जन ऋतु परिवर्तन के स्वास्थ्यवर्धक सिद्धांतों और भक्ति मार्ग का पालन करते हुए इन चार महीनों में अपने खान-पान और दिनचर्या में विशेष संयम रखेंगे।