कोटा विश्वविद्यालय के सभागार में पोडियम पर खड़े वक्ता उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए।

कोटा। कोटा विश्वविद्यालय के सभागार, नागार्जुन भवन में विश्वविद्यालय भेषजीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के संयुक्त तत्वावधान में ‘नमामि भारतम्’ एवं ‘विश्व फार्मासिस्ट दिवस’ समारोह का गरिमामयी आयोजन किया गया। माननीय कुलगुरु प्रो. बी. पी. सारस्वत के प्रेरणा एवं कुशल मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्र-चेतना और फार्मेसी के दायित्व का संदेश एक साथ सामने आया।

संयुक्त आयोजन के दो प्रमुख आयाम रहे। वंदे मातरम् के 150 गौरवशाली वर्षों को समर्पित ‘नमामि भारतम्’-एक स्वर: वंदे मातरम् तथा ‘विश्व फार्मासिस्ट दिवस’ पर ‘सशक्त फार्मासिस्ट, स्वस्थ भविष्य’ विषय के माध्यम से कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की संयोजक प्रोफेसर रीना दाधीच ने स्वागत उद्बोधन दिया और सम्पूर्ण भारत में एक साथ हो रहे आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान, नई दिल्ली के राष्ट्रीय अभियान में चित्तोड़ प्रांत की पहल ‘नमामि भारतम्’ अभियान के तहत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देश भर में चल रहे इस अनुष्ठान की कड़ी में कोटा विश्वविद्यालय में ठीक 11 बजे समवेत स्वरों में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गान किया गया। इसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड एवं इंडियन रिकॉर्ड बुक द्वारा प्रमाणित करवाया जाएगा।

फार्मेसी विभाग के पाठ्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर भवानी सिंह ने अपने संबोधन में विभाग की प्रगति और सुचारू संचालन पर प्रकाश डाला। उन्होंने फार्मासिस्ट विद्यार्थियों को फार्मेसी के कार्य को कर्तव्यनिष्ठा से निभाने का संकल्प दिलाया।

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में विश्व हिन्दू परिषद, चित्तौड़ प्रांत के श्री युधिष्ठिर सिंह हाड़ा ने मुख्य वक्तव्य दिया। उन्होंने वन्देमातरम के क्रमिक विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ‘वन्दे मातरम्’ भारत की मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। इसे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रगीत बताते हुए उन्होंने कहा कि इस गीत ने स्वतंत्रता सेनानियों में देशभक्ति की भावना जगाई। उन्होंने ‘वन्दे मातरम्’ के सम्मान और गायन को राष्ट्रीय एकता की भावना से जोड़ते हुए कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे देश के प्रति अपने कर्तव्यों को समझें और ईमानदारी, अनुशासन तथा सेवा को जीवन का आधार बनाएं।

विशिष्ट अतिथि स्वामी विवेकानंद शिक्षा समूह, भवानीमंडी के समन्वयक एवं सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय श्री हिमांशु चतुर्वेदी ने भी अपने बहुआयामी विचार रखे। उन्होंने ‘विश्व फार्मासिस्ट दिवस’ के अवसर पर स्वास्थ्य सेवा में फार्मासिस्ट के अद्वितीय योगदान को रेखांकित किया। ऋषि सुषेण एवं हनुमान जी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने संजीवनी लाकर देने वाले कर्मठ फार्मासिस्ट बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के सह संयोजक एवं भौतिक शास्त्र विभाग के प्रोफेसर नारायण हेडा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस महाकुंभ को सफल बनाने वाले सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोगियों, शिक्षकों और ऊर्जावान विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। प्रभावी मंच संचालन से युवराज आशावत ने विद्यार्थियों सहित उपस्थित आगंतुकों को प्रभावित किया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में फार्मेसी विभाग की विभागाध्यक्ष सरिता सोलंकी, भानु प्रताप सिंह, एन.एस.एस. के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. श्वेता व्यास एवं डॉ. आशीष आसोपा के साथ ही फार्मेसी संकाय के सभी सदस्यों का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ। अंत में राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत के साथ यह ऐतिहासिक और प्रेरणादायी आयोजन सम्पन्न हुआ।

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