कोटा के ऋद्धि-सिद्धि नगर जैन मंदिर में मुनिश्री विवर्धन सागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित किया।

 आधुनिक जीवनशैली और उच्च शिक्षा की दौड़ में युवा पीढ़ी धार्मिक संस्कारों से दूर होती जा रही है। परिवारों में आर्थिक उपलब्धियों को प्राथमिकता मिलने से पारंपरिक धार्मिक परंपराएं भी प्रभावित हो रही हैं। ऐसे में संस्कारित नारी परिवार में धार्मिक मूल्यों और परंपराओं को फिर से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह विचार गणधर मुनि श्री 108 विवर्धन सागर महाराज ने कोटा के कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के श्री 1008 चंद्रप्रभु दिगंबर जैन जिनालय में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।

विराग वर्धन पावन वर्षायोग-2026 के अंतर्गत आयोजित धर्मसभा में मुनिश्री ने कहा कि संस्कारित नारी केवल परिवार की आधारशिला नहीं होती, बल्कि वह पूरे घर की दशा और दिशा बदलने में समर्थ होती है। उसके सद्गुण, क्षमाशीलता, त्याग, समर्पण और धर्मपरायणता से परिवार में संस्कारों का संचार होता है।

नारी के गुणों की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि वह कार्यों में मंत्री के समान परामर्श देने वाली, आज्ञापालन में दासी के समान, भोजन कराने में माता के समान और क्षमा धारण करने में धरती के समान होती है। परिवार में संस्कारों को बनाए रखने और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में नारी की भूमिका महत्वपूर्ण है।

मुनिश्री ने चिंता जताई कि उच्च शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली की दौड़ में बड़ी संख्या में युवा धार्मिक संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। जिन परिवारों में पति-पत्नी दोनों नौकरी करते हैं, वहां कई बार पारिवारिक आनंद के बजाय आर्थिक उपलब्धियां प्राथमिकता बन जाती हैं। उन्होंने कहा कि घर में संस्कारित बहू के आने से धार्मिक परंपराएं पुनर्जीवित हो सकती हैं। इसके साथ ही आहार के लिए चौका लगाने जैसी पारंपरिक व्यवस्थाएं भी दोबारा शुरू हो सकती हैं।

धर्मसभा का शुभारंभ हुआ। प्रवचन के बाद श्रावक श्रेष्ठी वीरेन्द्र मारवाड़ा ने प्रश्नमंच आयोजित करने का सुझाव दिया।

मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि गणधर मुनि श्री विवर्धन सागर महाराज का आहार इलायचीदेवी एवं चंद्रेश रावका परिवार (बूंदी वाले) के यहां पार्श्वनाथ एन्क्लेव में हुआ। वहीं प्रवर्तक मुनि श्री विश्वनायक सागर महाराज का आहार पारस कुमार एवं रिंकू कुमार बज परिवार के यहां रजत सिटी में संपन्न हुआ।

उन्होंने बताया कि भवन में पिछले चार माह से सुगंधिदेवी, महेंद्र बगड़ा एवं मौसम त्रिपाल आहार व्यवस्था में सहयोग कर रहे हैं।

इस अवसर पर टीकम पाटनी, पुष्प लुहाड़िया, प्रेमचंद दुगेरिया, बसंतीलाल दोषी, सुरेंद्र पहाड़िया, आशीष ठोला एवं ऋषभ बाकलीवाल सहित समाज के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा में नारी के त्याग, समर्पण और क्षमाशीलता के माध्यम से परिवार में धार्मिक संस्कारों और परंपराओं को बनाए रखने का संदेश दिया गया।

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