कोटा में कैंसर के आयुर्वेदिक प्रबंधन पर राष्ट्रीय सेमिनार 'अर्बुद विज्ञानीयम्' का आयोजन हुआ।

कोटा में कैंसर के आयुर्वेदिक प्रबंधन, नवीन अनुसंधान और रोगियों की देखभाल के नए आयामों पर देशभर के विशेषज्ञ मंथन करेंगे। आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और पंचगव्य के माध्यम से कैंसर प्रबंधन की संभावनाओं पर चर्चा के लिए दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘अर्बुद विज्ञानीयम्’ का आयोजन 1 और 2 नवंबर को किया जाएगा। इस दौरान कैंसर के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ अपने शोध और चिकित्सकीय अनुभव साझा करेंगे।

वैद्य दाऊदयाल जोशी राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय तथा श्री हाड़ौती गौ सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सेमिनार का उद्देश्य कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ आयुर्वेद एवं आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के बीच शोध और अनुभवों का आदान-प्रदान करना है।

सेमिनार से पहले शनिवार को महाविद्यालय परिसर में कैंसर जागरूकता रैली निकाली गई। प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा के नेतृत्व में रैली महाविद्यालय से रवाना होकर तलवंडी सर्किल और विज्ञान नगर चौराहे से होते हुए वापस महाविद्यालय पहुंचकर संपन्न हुई। रैली में शामिल विद्यार्थियों, अध्यापकों और चिकित्सकों ने हाथों में कैंसर जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर धूम्रपान और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। ‘धूम्रपान छोड़ेंगे, तनाव से नाता तोड़ेंगे’ जैसे नारों के माध्यम से आमजन को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

आयोजन समिति के चेयरमैन एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नित्यानंद शर्मा ने बताया कि 1 नवंबर को सुबह 9 बजे पंजीयन और किट वितरण के साथ कार्यक्रम शुरू होगा। उद्घाटन सत्र के बाद प्रथम तकनीकी सत्र में सुधा मेडिकल कॉलेज कोटा के ऑन्कोलॉजी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रमाकांत तिवारी ‘हेड एंड नेक कैंसर’ विषय पर व्याख्यान देंगे। इसके बाद भारत विकास परिषद कोटा के सीनियर स्पेशलिस्ट मेडिसिन फिजिशियन डॉ. अनिल सोनी कैंसर के सामान्य पहलुओं पर जानकारी देंगे। दोपहर के सत्र में महाविद्यालय के संहिता एवं सिद्धांत विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बृजराज मालव व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे।

सेमिनार के प्रथम दिवस का प्रमुख व्याख्यान आईएमएस, बीएचयू के संज्ञाहरण विभाग के सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष डॉ. के.के. पांडे देंगे। वे ‘कैंसर : वैश्विक चुनौतियां एवं पंचगव्य और आयुर्वेद चिकित्सा की संभावनाएं’ विषय पर अपने शोध और अनुभव साझा करेंगे।

आयोजन समिति की संयोजक डॉ. ऋतुरा शर्मा ने बताया कि 2 नवंबर को दूसरे दिन भी विशेषज्ञों के व्याख्यान होंगे। सीसीआरएएस, आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. भावित बंसल कैंसर देखभाल में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की भूमिका पर केस आधारित व्याख्यान देंगे। जयपुर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के अगद तंत्र विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शरद पोर्टे कैंसर रोगियों के निदान एवं आयुर्वेदिक प्रबंधन से जुड़े अपने चिकित्सकीय अनुभव साझा करेंगे। इसके बाद नवग्रह आश्रम, भीलवाड़ा के हंसराज चौधरी का व्याख्यान होगा। दोपहर 3:30 बजे समापन समारोह और प्रशस्ति पत्र वितरण किया जाएगा।

सेमिनार में वरिष्ठ वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी भाग लेंगे। बीएचयू में 36 वर्षों तक अध्यापन एवं अनुसंधान से जुड़े रहे डॉ. के.के. पांडे कैंसर रोगियों के दर्द प्रबंधन, आयुर्वेद और पंचगव्य से संबंधित अपने शोध अनुभव साझा करेंगे। उनके 13 पुस्तकों और 100 से अधिक शोध पत्रों के प्रकाशन की जानकारी दी गई है।

कोटा विश्वविद्यालय की माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. पल्लवी शर्मा दो दशक के अध्यापन एवं अनुसंधान अनुभव के साथ अपने शोध कार्यों की जानकारी देंगी। वे विशेष रूप से गोमूत्र के चिकित्सकीय उपयोग से जुड़े अनुसंधान पर चर्चा करेंगी। वहीं, कोटा विश्वविद्यालय की डॉ. नीलू चौहान पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, गोबर से उपयोगी उत्पादों के निर्माण और गौशालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की संभावनाओं पर अपने शोध प्रस्तुत करेंगी।

श्री हाड़ौती गौ सेवा संस्थान क्षेत्र की 150 से अधिक गौशालाओं का संगठन है। संस्थान गो आधारित अनुसंधान एवं चिकित्सा संबंधी विषयों पर कार्य कर रहा है। इसी पहल के तहत विशेषज्ञों को आमंत्रित कर चिकित्सकों, विद्यार्थियों और आमजन तक नवीन शोध एवं अनुसंधान की जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

आयोजन समिति में डॉ. ऋतुराज शर्मा के साथ डॉ. मांडवी गौतम, डॉ. कृष्ण मुरारी जैन, डॉ. कैलाश चंद्र बारोलिया, डॉ. बृजराज मालव, डॉ. राकेश परिहार एवं डॉ. सुरभि पंकज व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दो दिवसीय सेमिनार में कैंसर के आयुर्वेदिक प्रबंधन, रोगियों की देखभाल और नवीन अनुसंधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों के विचार सामने आएंगे।

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