कोटा भूमि विकास बैंक: 2 करोड़ ऋण लक्ष्य और बकाया छूट का प्रस्ताव
बैठक में 15-20 साल पुराने बकाएदारों के लिए मुख्यमंत्री एकमुश्त समझौता योजना के तहत संपूर्ण ऋण माफ करने की मांग उठाई गई।
कोटा में भूमि विकास बैंक की बैठक में ऋण वितरण और वसूली की समीक्षा की गई।
कोटा में भूमि विकास बैंक लिमिटेड की जिला स्तरीय अनुपवर्तन एवं समीक्षा समिति की बैठक में 2 करोड़ रुपये के ऋण वितरण लक्ष्य, बैंक की हिस्सा राशि में वृद्धि और ऋण वसूली की स्थिति पर चर्चा हुई। बैठक में लंबे समय से बकाया ऋणों के मामलों में राहत देने और एकमुश्त समझौता योजना के तहत शेष प्रकरणों के लिए सम्पूर्ण बकाया माफ करने का प्रस्ताव भी लिया गया।
17 अक्टूबर को बैंक के प्रधान कार्यालय कोटा में आयोजित बैठक की अध्यक्षता बैंक अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने की। बैठक में राजेश कुमार मीना, उप रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां कोटा, आर.पी. शर्मा, जिला प्रबंधक, नाबार्ड कोटा, यशपाल सिंह, प्रबंधक, राज्य बैंक जयपुर तथा बैंक सचिव श्रीमती ऋतु सपरा शामिल हुईं। बैठक में वर्ष 2024-25 और 2025-26 की प्रगति की समीक्षा करते हुए बैंक की हिस्सा राशि बढ़ाने, ऋण वितरण में वृद्धि करने और ऋण वसूली की स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में उप रजिस्ट्रार सहकारी समितियां कोटा राजेश मीणा ने बैंक की हिस्सा राशि बढ़ाने के लिए प्रयास करने के निर्देश दिए। इस पर बैंक सचिव ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 422 अवधिपार ऋण खातों का पूर्ण चुकारा होने के बाद उन खातों की जमाशुदा हिस्सा राशि का ऋण पेटे समायोजन किया गया। इसके कारण बैंक की हिस्सा राशि में कमी आई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में बैंक को 2 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का लक्ष्य मिला है। इस लक्ष्य के तहत ऋण वितरित होने पर बैंक की हिस्सा राशि में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।
बैंक अध्यक्ष चैन सिंह राठौड़ ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 के तहत वसूली की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत लगभग 41 प्रतिशत ही वसूली हो सकी है। शेष प्रकरणों में ऐसे ऋण भी शामिल हैं, जो बैंक में 15-20 वर्ष से अधिक अवधि से बकाया हैं।
राठौड़ ने कहा कि मृतक, लघु एवं सीमांत, स्वरोजगार तथा महिला विकास ऋणियों के मामलों में सम्पूर्ण बकाया माफ किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन ऋणियों की देयनीय आर्थिक स्थिति के कारण वे मुख्यमंत्री अवधिपार ब्याज राहत एकमुश्त समझौता योजना 2025-26 के तहत भी ऋण चुकाने में असमर्थ रहे हैं। उन्होंने प्राथमिक बैंकों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए सम्पूर्ण राहत का खर्च राज्य सरकार की ओर से वहन किए जाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव सर्वसम्मति से राज्य सरकार, सहकारिता विभाग और राज्य बैंक को भिजवाने का निर्णय लिया गया। वहीं, नाबार्ड के जिला प्रबंधक आर.पी. शर्मा ने बैंक को गुणवत्तापूर्ण और विविधीकृत ऋण वितरण पर जोर दिया। बैठक में राज्य बैंक और भूमि विकास बैंक के बीच असंतुलन की राशि के लिए पैकेज उपलब्ध कराने तथा बैंक की आय बढ़ाने वाली गतिविधियों के विस्तार के लिए राज्य सरकार से मांग करने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में लिए गए निर्णयों के तहत एक ओर वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 2 करोड़ रुपये के ऋण वितरण लक्ष्य पर जोर दिया गया, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से बकाया ऋणों के निस्तारण और आर्थिक रूप से कमजोर ऋणियों को राहत देने के प्रस्ताव राज्य सरकार तक पहुंचाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।