कोटामें गणेश चतुर्थी के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ एवं इको फ्रेंडली श्री गणपति क्लब की ओर से निशुल्क इको-फ्रेंडली गणपति प्रतिमाओं का वितरण शनिवार से शुरू किया गया। अभियान के तहत जलाशयों और प्रकृति को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) तथा रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचाने के उद्देश्य से 1156 शुद्ध मिट्टी से निर्मित इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं और 1156 केसरिया धर्म ध्वज निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं। इस हरित मुहिम को जन-जन तक पहुंचाने के लिए महासंघ ने 15 लाख रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया है।

महासंघ के अध्यक्ष गोविन्दनारायण अग्रवाल ने बताया कि शहर के 100 वार्डों में पूर्व पंजीकृत 1000 परिवारों को 9 तथा 12 इंच की इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं घर-घर जाकर वितरित की गई हैं। प्रतिमाओं के वितरण की शुरुआत टीलेश्वर महादेव मंदिर से हुई, जहां नियुक्त ‘भुजबंद प्रभारियों’ को प्रतिमाएं सौंपी गईं। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए कोटा किटी क्लब की 100 महिलाओं को विशेष जिम्मेदारी दी गई है। इनमें 25 ‘चारभुजा धारी प्रभारी’ चार-चार वार्डों की कमान संभाल रही हैं।

पर्यावरण रक्षा का संकल्प लेने वाले प्रत्येक वार्ड के 10 चयनित परिवारों को ‘इको-फ्रेंडली सोशल क्रांतिकारी परिवार गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया जाएगा। ये परिवार ‘पर्यावरण प्रहरी’ के रूप में अपनी पहचान बनाएंगे।

अभियान के दूसरे चरण में रविवार को आयोजित विशेष समारोह में 56 पंजीकृत सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं को सार्वजनिक पंडालों के लिए 4 फीट तथा 6 फीट की विशाल मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं निशुल्क दी जाएंगी। अध्यक्ष डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि सभी प्रतिमाओं को पर्यावरण संदेश युक्त विशेष बॉक्स में पैक किया गया है। इसमें प्रतिमा के साथ 18x30 इंच की ‘शुद्ध जल स्वस्थ जीवन का आधार’, ‘पर्यावरण प्रहरी परिवार’ अंकित केसरिया धर्म ध्वज, जल शुद्धता का संकल्प पत्र, विशेष स्टीकर और गौरव सम्मान पत्र शामिल है। सार्वजनिक मंडलों के लिए 3x5 फीट की ‘पर्यावरण प्रहरी मंडल’ अंकित धर्म ध्वजाएं भी दी जा रही हैं।

संस्थापक महामंत्री राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ ने बताया कि पर्यावरण और जलीय जीवों की सुरक्षा के लिए क्लब ने विशेष नवाचार करते हुए 240 किलो शुद्ध मिट्टी से 7 फीट ऊंची संत स्वरूपा ‘श्री चंदन गणेश’ की भव्य प्रतिमा तैयार की है। इसे गुरु धाम कॉलोनी में स्थापित किया जाएगा। प्रतिमा पर 15 किलो औषधीय चंदन पाउडर का लेप किया गया है। इसका श्रृंगार केवल केसर, कुमकुम, हल्दी व चूने जैसे प्राकृतिक रंगों तथा 1200 रुद्राक्ष की मालाओं से किया गया है। विसर्जन के समय चंदन पाउडर पानी में घुलकर जलीय जीवों को औषधीय लाभ पहुंचाएगा।

इसके अतिरिक्त महासंघ की ओर से 45 दिवसीय विशाल जन जागरण रथ शहर भर में घुमाया जा रहा है। इसके माध्यम से लोगों को पीओपी के खतरों के प्रति सचेत किया जा रहा है।

महासंघ के मुख्य संयोजक गोविन्द नारायण अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत में कोटा के गणेश महोत्सव को ‘जिला महोत्सव’ घोषित करने तथा स्थानीय गणेश मंडलों को सरकारी अनुदान देने की मांग उठाई। उन्होंने घोषणा की कि वर्ष 2026 में पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं स्थापित करने वाले 21 सर्वश्रेष्ठ गणेश मंडलों का चयन किया जाएगा और प्रत्येक को 5,100 रुपए की नगद राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।

मुख्य संरक्षक डॉ. अरुणा अग्रवाल ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास के कम से कम 5 अन्य परिवारों को इस मुहिम से जोड़ें। इन परिवारों को वर्ष 2027 में इको फ्रेंडली श्री गणपति क्लब की ओर से निशुल्क इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं प्रदान की जाएंगी। इस पहल के तहत मिट्टी की प्रतिमाओं के उपयोग और पर्यावरण संरक्षण का संदेश घरों से लेकर सार्वजनिक गणेश मंडलों तक पहुंचाने की योजना है।

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