इस्कॉन नंदग्राम धाम कोटा में धूमधाम से मनाया गया श्री राधाष्टमी महोत्सव
मंदिर में श्री श्री राधा माधव के दिव्य महाभिषेक, झूलन उत्सव और हरिनाम संकीर्तन के साथ भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
तस्वीर में कोटा के इस्कॉन मंदिर का गर्भगृह फूलों से सजा हुआ दिख रहा है।
व्रज की अधिष्ठात्री, करुणा और प्रेम की मूर्ति श्रीमती राधा रानी के प्राकट्य दिवस श्री राधाष्टमी के पावन अवसर पर इस्कॉन नंदग्राम धाम, मुकुंद विहार, कोटा में विशाल आध्यात्मिक महोत्सव हर्षोल्लास और भक्तिमय माहौल में संपन्न हुआ। महोत्सव के दौरान मंदिर में विशेष सजावट, दिव्य दर्शन, श्री श्री राधा माधव का महाभिषेक, झूलन उत्सव और भव्य हरिनाम संकीर्तन आकर्षण का केंद्र रहे।
मंदिर के उपाध्यक्ष श्री राधाप्रिय दास जी ने बताया कि श्रीमती राधा रानी कोई साधारण व्यक्ति नहीं, अपितु भगवान श्री कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति हैं। जिस प्रकार शक्ति के बिना शक्तिमान अधूरा है, उसी प्रकार राधा रानी के बिना श्री कृष्ण की लीला भी अधूरी है। श्रीमद् भागवतम के अनुसार, राधा रानी की कृपा से ही जीव को शुद्ध कृष्ण प्रेम की प्राप्ति होती है।
श्री राधाष्टमी महोत्सव के लिए पूरे मंदिर को सुंदर और महकते हुए फूलों से श्री वृन्दावन धाम की तरह सजाया गया। मंदिर की विशेष सजावट ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया। इस अवसर पर श्री चैतन्य महाप्रभु और श्री नित्यानंद प्रभु के विशेष शृंगार में श्री श्री गौर निताई के दिव्य दर्शन भक्तों को प्राप्त हुए।
महोत्सव का प्रमुख आयोजन शाम 7 बजे हुआ, जब वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री श्री राधा माधव का पंचामृत और पंचगव्य से दिव्य महाभिषेक किया गया। महाभिषेक के दर्शन कर भक्तों ने अपने जीवन को धन्य किया।
इसके बाद श्रीमती राधा रानी को सुंदर फूलों से सजे विशेष झूले में झुलाया गया। झूलन उत्सव के दौरान भक्तों को वृंदावन के कुंज का स्मरण हुआ, जहां राधा कृष्ण सदैव दिव्य लीला करते हैं।
महोत्सव के दौरान इस्कॉन के भक्तों ने हरे कृष्ण महामंत्र एवं वैष्णव भजनों पर भव्य हरिनाम संकीर्तन किया। इससे पूरा वातावरण श्री राधामय हो गया। मंदिर में निरंतर नाम जप और विशेष प्रवचन का आयोजन भी हुआ। इसके बाद भक्तों ने महाप्रसाद ग्रहण किया।
श्री राधाष्टमी महोत्सव में आध्यात्मिक आयोजनों, दिव्य दर्शन, महाभिषेक, झूलन उत्सव और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से भक्तिमय वातावरण बना रहा।