झालावाड़ (सुरेश मोमिया)। निकाय चुनाव के नामांकन की प्रक्रिया पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई है और मतदाताओं ने अपने वार्ड के पार्षद चुनने के लिए EVM का बटन भी नहीं दबाया है, लेकिन शहर में सभापति की कुर्सी के संभावित दावेदार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। गली-नुक्कड़ और चौपालों तक में एक ही नाम की चर्चा होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में चुनाव से पहले ही सभापति की कुर्सी तय होने की चर्चा ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शहर में चर्चा है कि जिस व्यक्ति को जनता की नजर में स्वीकार्यता नहीं मिली है, उसे कुछ तथाकथित आका नगर परिषद की कमान सौंपने की तैयारी में हैं। निकाय चुनाव में जनता अपने वार्ड के प्रतिनिधि चुनेगी, लेकिन उससे पहले ही सभापति पद के लिए दावेदार तय किए जाने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।

सूत्रों की मानें तो जिनके नाम को सभापति पद की संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है, उनके खिलाफ सरकारी जमीनों, नदी-नालों और तालाबों के पेटे तक पर कब्जे और उन्हें बेचे जाने से जुड़े गंभीर आरोपों की चर्चा है। आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेशों की परवाह किए बिना, बिना किसी वैधानिक पावर के सिर्फ पैसे के पावर के दम पर सरकारी जमीनों और जलस्रोतों से जुड़ी जमीनों को ठिकाने लगाने का काम किया गया।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिन लोगों की पहचान सरकारी भूमियों को ठिकाने लगाने से जुड़े आरोपों के कारण चर्चा में रही है, क्या उन्हें अब पूरे शहर का आधिकारिक कस्टोडियन बनाने की तैयारी की जा रही है? नगर परिषद की जिम्मेदारी मिलने के बाद शहर की जमीनों और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े फैसलों पर इसका क्या असर होगा, यह सवाल भी चर्चाओं के केंद्र में है।

हर पांच साल में मतदाता नए प्रतिनिधियों को चुनकर शहर के विकास की उम्मीद करते हैं। ऐसे में चुनाव से पहले ही किसी व्यक्ति की सभापति पद पर ताजपोशी की चर्चा आम मतदाताओं के लिए बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। जन-अधिकारों की बोली लगाकर अपनी तिजोरियां भरने के आरोपों से जुड़े व्यक्ति को नगर परिषद की शीर्ष कुर्सी पर बैठाने की तैयारी की चर्चाओं ने शहर के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

अब निगाहें निकाय चुनाव पर हैं। यह देखना अहम होगा कि झालावाड़ की जनता चुनाव में धनबल और कब्जे से जुड़ी इस कथित राजनीति को स्वीकार करती है या फिर चुनाव परिणामों के जरिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराती है।

Tags: