टीजड़ी पर्व पर सिंधी समाज की महिलाएं रखेंगी व्रत, गौरी-शंकर की करेंगी पूजा-अर्चना
सिंधी समाज की महिलाएं सोमवार को टीजड़ी पर्व पर व्रत रखेंगी। जवाहर नगर के झूलेलाल मंदिर में पूर्व संध्या पर विशेष उत्सव होगा।
सिंधी समाज की महिलाएं सुहागिनों के प्रमुख पर्व टीजड़ी को सोमवार को श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाएंगी। महिलाएं पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए टीजड़ी माता का व्रत रखेंगी तथा भगवान शिव और माता गौरी की पूजा-अर्चना करेंगी।
समाज के तुलसी संगतानी ने बताया कि टीजड़ी पर्व पर टीजड़ी माता की धान्य रूप में पूजा की जाती है। पर्व की परंपरा के अनुसार महिलाएं भोर होने से पहले उठकर कोकी, मीठी मानी सहित विभिन्न पारंपरिक सिंधी व्यंजन तैयार कर अल्पाहार करती हैं। इसके बाद दिनभर निराहार रहकर उपवास रखा जाता है।
पर्व के दौरान सुहागिन महिलाएं सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती हैं। ब्राह्मणी के घर सभी सुहागिन महिलाएं एकत्रित होती हैं और माता को हिन्दोरे में झुलाती हैं। इस दौरान माता गौरी और भगवान शंकर की महिमा की कथा सुनी जाती है। जवारों को मीठा जल अर्पित कर चरणामृत ग्रहण किया जाता है। रात्रि में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को दूध और कुट्टी का अर्घ्य देकर व्रत का पारणा किया जाता है।
टीजड़ी की पूर्व संध्या पर विशेष उत्सव
सिंधी नारी शक्ति समूह की ओर से टीजड़ी की पूर्व संध्या पर रविवार, 30 अगस्त को जवाहर नगर स्थित झूलेलाल मंदिर में शाम 4 बजे से टीजड़ी उत्सव आयोजित किया जाएगा। संयोजिका निशिता वाधवानी ने बताया कि सिंधी समाज की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं के लिए मेहंदी, मनोरंजक कार्यक्रम और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि टीजड़ी के अवसर पर सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार कर हाथों में मेहंदी रचाती हैं और अपने परिवार सहित समाज की सुख-समृद्धि एवं सभी के मंगल की कामना करती हैं। यह पर्व सिंधी समाज की महिलाओं की आस्था, पारंपरिक संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का प्रतीक है।