मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी जैविक खाद, नगर निगम जयपुर ने शुरू किया ‘शिवार्पणम्’ अभियान

नगर निगम जयपुर के ‘शिवार्पणम्’ अभियान में मंदिरों के निर्माल्य से बनेगी जैविक खाद, जानिए कैसे बदलेगा धार्मिक अवशेषों का उपयोग।

Update: 2026-07-27 13:32 GMT

तस्वीर में जयपुर नगर निगम का ई-हॉपर वाहन दिख रहा है जिस पर 'शिवार्पणम्' अभियान का लोगो और बोर्ड लगा हुआ है और वाहन को फूलों तथा बेलपत्रों से सजाया गया है।

सावन के पावन माह में धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए नगर निगम जयपुर ने अनूठी पहल ‘शिवार्पणम्’ की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत शिवालयों में भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बेलपत्र, पुष्प और अन्य जैविक निर्माल्य को अब कचरे में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया से जैविक खाद में परिवर्तित कर श्रद्धालुओं और आमजन को ‘शिवार्पणम्’ प्रसाद पैकेट के रूप में वितरित किया जाएगा।

नगर निगम जयपुर का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है। सावन के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं, जिसमें बड़ी मात्रा में बेलपत्र, पुष्प एवं अन्य जैविक निर्माल्य अर्पित किए जाते हैं। अब इन पवित्र अवशेषों का वैज्ञानिक उपयोग करते हुए इन्हें लगभग 30 दिनों में जैविक खाद में बदला जाएगा।

‘शिवार्पणम्’ अभियान के तहत प्रत्येक सोमवार चयनित मंदिरों से नगर निगम का EV हॉपर निर्माल्य संग्रह करेगा। इसके बाद इस सामग्री को निकटतम उद्यान में स्थापित श्रेडर मशीन के माध्यम से प्रोसेस किया जाएगा। प्रोसेसिंग के बाद कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार की जाएगी। तैयार खाद को ‘शिवार्पणम्’ पैकेट के रूप में श्रद्धालुओं और नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा।

नगर निगम जयपुर ने इस पायलट परियोजना की शुरुआत ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव एवं रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से की है। यह अभियान पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार संचालित किया जाएगा।

नगर निगम आयुक्त श्री ओम कसेरा ने कहा, "भगवान शिव को अर्पित हुआ प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। 'शिवार्पणम्' आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल है।"

‘शिवार्पणम्’ अभियान से मंदिर परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने, डंपिंग यार्ड पर जैविक कचरे की मात्रा कम करने, अतिरिक्त निवेश के बिना मौजूदा संसाधनों के उपयोग और जैविक खाद के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह पहल धार्मिक आस्था और सर्कुलर इकोनॉमी के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

नगर निगम जयपुर की इस पहल का संदेश है कि शिव को अर्पित हर पत्ता अब धरती के लिए प्रसाद बनेगा, यही ‘शिवार्पणम्’ अभियान की मूल भावना है।

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