राजस्थान बना ‘सहकार से समृद्धि’ मॉडल का अग्रदूत, अन्न भंडारण से ई-पैक्स तक देश में प्रथम स्थान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान ने सहकारिता मॉडल के जरिए अन्न भंडारण, ई-पैक्स और एम-पैक्स सहित कई राष्ट्रीय योजनाओं में देश में पहला स्थान हासिल किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने सहकारिता को विकास और समृद्धि का प्रभावी माध्यम बनाते हुए राष्ट्रीय योजनाओं और नवाचारों के क्रियान्वयन में देशभर में अग्रणी स्थान हासिल किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए प्रदेश ने अन्न भंडारण क्षमता, ई-पैक्स के माध्यम से ऑनलाइन लेनदेन और एम-पैक्स के गठन सहित कई प्रमुख योजनाओं में देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य सरकार का दावा है कि सहकारिता मॉडल के विस्तार से गांव-ढाणी तक आत्मनिर्भरता बढ़ी है और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को भी नई गति मिली है।
बीते ढाई वर्षों में राजस्थान ने सहकारिता मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए कई राज्यों को पीछे छोड़ते हुए प्रमुख क्षेत्रों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत वर्ष 2024-25 और 2025-26 में प्रदेश में 200 गोदाम स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 120 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष पर कार्य जारी है। वर्ष 2026-27 में 50 नए गोदामों के निर्माण का प्रस्ताव है। इस योजना के माध्यम से तीन वर्षों में राजस्थान की भंडारण क्षमता में कुल 1 लाख 25 हजार मीट्रिक टन की वृद्धि होगी।
राष्ट्रीय सहकारी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू करने में राजस्थान की उपलब्धियों को 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित समारोह में भी प्रमुखता मिली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले 10 नए अन्न भंडारण गोदामों का शिलान्यास किया गया, 50 गोदामों का लोकार्पण हुआ तथा राज्य भंडारण निगम को 100 गोदामों का हस्तांतरण किया गया।
राज्य सरकार के अनुसार प्रदेश में सहकारिता आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है। वर्तमान में राजस्थान में 42 हजार से अधिक सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे 1 करोड़ 35 लाख से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। सहकार सदस्यता अभियान के तहत 8 लाख 90 हजार नए सदस्य जोड़कर सहकार परिवार का विस्तार किया गया है।
सहकारिता क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए पैक्स के कम्प्यूटरीकरण के साथ उन्हें ई-पैक्स के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रथम चरण में चिह्नित 6 हजार 781 पैक्स में से 5 हजार 646 ई-पैक्स बनाए जा चुके हैं। इनके माध्यम से 10 करोड़ से अधिक ऑनलाइन लेनदेन दर्ज किए गए हैं, जो देश के कुल ट्रांजेक्शन का लगभग एक तिहाई होने के साथ सभी राज्यों में सर्वाधिक हैं।
हर पंचायत में सहकारी समिति गठित करने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत अब तक 5 हजार 279 नई बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया जा चुका है। इनमें 1 हजार 977 एम-पैक्स का गठन कर राजस्थान ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है।
प्रदेश की लगभग 4 हजार 875 पैक्स तीन या उससे अधिक व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रही हैं। इनके माध्यम से कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र, किसान उत्पादक संगठन और जन औषधि केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं। किसानों की राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पैक्स को भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की सदस्यता भी दिलाई जा रही है। इस अभियान में 6 हजार 753 पैक्स के आंकड़े के साथ राजस्थान देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
राजस्थान के डेयरी क्षेत्र में लागू सहकारिता मॉडल ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण का प्रमुख माध्यम बनकर उभरा है। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन तथा जिला दुग्ध संघों से जुड़े नए सदस्यों की संख्या में 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। लगभग 9 लाख 40 हजार दुग्ध उत्पादक सदस्यों में 4 लाख 20 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं। राज्य सरकार के अनुसार डबल इंजन सरकार के प्रयासों से घाटे में चल रहे डेयरी संघ अब लाभ अर्जित कर रहे हैं और हाल ही में दर्ज किया गया 10 हजार करोड़ रुपये का रिकॉर्ड टर्नओवर आरसीडीएफ तथा जिला दुग्ध संघों के 47 वर्षों के इतिहास में सर्वाधिक रहा है।
राज्य सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के मूल मंत्र के साथ अन्य योजनाओं के माध्यम से भी किसानों और पशुपालकों को लाभ पहुंचा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के जरिए 71 लाख से अधिक किसानों के खातों में कुल 2 हजार 726 करोड़ रुपये की राशि जमा करवाई गई है। वहीं, गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लगभग 60 हजार गोपालकों को ऋण उपलब्ध कराया गया है।
सहकारी उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘वोकल फॉर लोकल’ के तहत राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेला और संभागीय सहकारी मेलों का आयोजन किया है। प्रधानमंत्री की ‘श्री अन्न’ पहल के अंतर्गत प्रदेश में 240 श्री अन्न आउटलेट्स स्थापित किए गए हैं, जिनके माध्यम से पोषण के साथ स्थानीय उत्पादों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
निजी टैक्सी मॉडल के एकाधिकार को समाप्त करने के उद्देश्य से जयपुर में सहकारिता आधारित भारत टैक्सी डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। इस प्लेटफॉर्म से अब तक 17 हजार कैब, ऑटो और बाइक चालक जुड़ चुके हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहकारिता मॉडल के तहत प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों के माध्यम से आमजन को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिलों में जिला चिकित्सालय अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एक-एक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जयपुर के सुमेल गांव में 60 एकड़ से अधिक भूमि पर सहकार वन विकसित किया जा रहा है, जहां जनसहभागिता के साथ जापान की मियावाकी और सामान्य प्रणाली से वृक्षारोपण किया जाएगा।
राज्य सरकार का कहना है कि किसी भी देश या प्रदेश के वास्तविक विकास और समृद्धि के लिए सरकारी प्रयासों के साथ स्थानीय स्तर पर सहयोग और सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। इसी सोच के तहत प्रधानमंत्री द्वारा 6 जुलाई 2021 को शुरू किए गए सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से देशभर में सहकारिता क्षेत्र में आई परिवर्तनकारी पहल में राजस्थान ने अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है।