राजस्थान में कृषि विभाग का बड़ा कदम: 32 संगठनों से ऐतिहासिक एमओयू, प्राकृतिक खेती और एग्रीटेक को मिलेगा बढ़ावा
राजस्थान कृषि विभाग ने 32 संगठनों के साथ ऐतिहासिक एमओयू कर प्राकृतिक खेती, एग्रीटेक, एआई और कृषि नवाचार को नई दिशा देने की बड़ी पहल की।
जयपुर में आयोजित एमओयू हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता करतीं कृषि एवं उद्यानिकी विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती मंजू राजपाल।
राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। कृषि विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स तथा 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित कुल 32 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार तथा किसानों की आय में सतत वृद्धि को गति देना है। इसके साथ ही राजस्थान को प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती का हब बनाने के लक्ष्य के तहत प्रदेशभर में खेत बचाओ अभियान भी संचालित किया गया।
जयपुर स्थित पंत कृषि भवन में आयोजित समारोह की अध्यक्षता प्रमुख शासन सचिव, कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने की। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए सरकार, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स, सिविल सोसाइटी संगठनों और किसानों के बीच मजबूत सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यही सोच इस ऐतिहासिक साझेदारी का आधार बनी है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM) द्वारा प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM RKVY) के तहत 25 स्टार्टअप्स को 25 लाख रुपये तक, 25 स्टार्टअप्स को 5 लाख रुपये तक तथा चार विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रति विद्यार्थी 4 लाख रुपये का वार्षिक अनुदान दिया जाता है। वहीं, मणिपाल यूनिवर्सिटी द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है। इस एमओयू के तहत कृषि कार्यों में एआई के उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विभाग के प्रदेशभर से 100 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें अतिरिक्त निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक और सहायक निदेशक स्तर के अधिकारी शामिल रहे, ने गो आधारित प्राकृतिक एवं ऑर्गेनिक खेती को लेकर श्री रामशांताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केन्द्र तथा गोयल ग्रामीण विकास संस्थान, कोटा में मंथन किया।
आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने बताया कि प्रदेश में 87 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राजसमंद और सिरोही में फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को उनकी फार्मर आईडी के आधार पर अनुदानित उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों को विभागीय योजनाओं का लाभ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के लिए राज किसान साथी ऐप पर 150 से अधिक मॉड्यूल विकसित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी सहभागी संगठन एक साझा मंच पर मिलकर कार्य करेंगे, जिससे प्रदेश के किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती में अधिक लाभ मिल सकेगा। प्रत्येक तिमाही में सभी एमओयू से जुड़े संगठन कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे। जिला स्तर पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जिला प्रशासन की अहम भागीदारी रहेगी।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी समझौता ज्ञापन गैर-वित्त पोषित (Non-Financial) हैं। इससे राज्य सरकार पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से विभागीय योजनाओं की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि इस सहयोग मॉडल की रूपरेखा 12 जनवरी 2026 को आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में विभिन्न संस्थाओं के सुझावों और अनुभवों के आधार पर तैयार की गई थी।
उन्होंने बताया कि इन साझेदारियों के माध्यम से प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, जल संरक्षण, सामुदायिक संसाधन प्रबंधन, कृषि प्रशिक्षण, क्षमता विकास, कृषि नीति निर्माण, कृषि-2047 रोडमैप, कार्बन क्रेडिट, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन, विपणन, महिला किसान सशक्तिकरण तथा जनजातीय क्षेत्रों में कृषि विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एग्रीटेक स्टार्टअप्स किसानों तक आधुनिक डिजिटल तकनीक, स्मार्ट कृषि समाधान और नवाचार पहुंचाएंगे, जबकि सिविल सोसाइटी संगठन गांव-गांव तक प्रशिक्षण, जागरूकता, किसान समूहों के गठन तथा स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे।
इन समझौता ज्ञापनों का प्रत्यक्ष लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। किसानों को प्राकृतिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे खेती की लागत घटेगी, उत्पादकता बढ़ेगी तथा मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे उनकी आय बढ़ाने के नए अवसर विकसित होंगे।
विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान तथा जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन साझेदारियों का अधिक लाभ मिलेगा। प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन, तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर सतत सहयोग के माध्यम से कृषि को अधिक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाया जाएगा।
आयुक्त कृषि श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि राज्य सरकार का विजन-2047 राजस्थान को देश का अग्रणी कृषि राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है। इस विजन के प्रमुख स्तंभों में किसानों की आय में वृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों का उपयोग, कृषि विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, कृषि आधारित उद्यमिता तथा सार्वजनिक-निजी सहभागिता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हुए ये समझौता ज्ञापन विकसित राजस्थान-2047 के कृषि विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनसे प्राकृतिक खेती का विस्तार होगा, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से मुकाबला करने की क्षमता बढ़ेगी, नई तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा तथा कृषि विभाग, विशेषज्ञ संस्थाओं और किसानों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित होगा।
समारोह में कहा गया कि यह कार्यक्रम केवल एमओयू हस्ताक्षर तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान की कृषि को नवाचार, तकनीकी सहयोग और जनभागीदारी के माध्यम से नई दिशा देने का अभियान है। सरकार, अनुसंधान संस्थानों, स्टार्टअप्स और सिविल सोसाइटी की साझा भागीदारी से प्रदेश में कृषि को अधिक समृद्ध, टिकाऊ, जलवायु अनुकूल और लाभकारी बनाया जाएगा।
आगे की कार्ययोजना के तहत कृषि नवाचार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एग्री इनोवेशन एवं स्टार्टअप सेल की स्थापना की जाएगी। इस सेल के अंतर्गत एग्रीटेक स्टार्टअप्स के लिए एक समर्पित कॉल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जो मार्गदर्शन, समस्या समाधान और समन्वय के लिए एकल संपर्क बिंदु के रूप में कार्य करेगा। यह सेल कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), सहकारी संस्थाओं, उद्योग जगत, निवेशकों तथा वित्तीय संस्थानों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित कर स्टार्टअप्स को तकनीकी, संस्थागत और व्यावसायिक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।