जयपुर श्री अमरापुर स्थान में 9 जून से शुरू होगा स्वामी टेऊँराम चालीहा महोत्सव

श्री प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक की स्मृति में 40 दिनों तक चलेगा अनुष्ठान, 19 जुलाई को अखंड ज्योत के साथ होगा समापन।

Update: 2026-06-05 14:31 GMT

जयपुर के श्री अमरापुर स्थान परिसर में स्वामी टेऊँराम जी महाराज के चालीहा महोत्सव की तैयारियों के बीच दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु।

राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर स्थित प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल श्री अमरापुर स्थान में आगामी 9 जून से भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म के अनुपम समागम 'चालीहा महोत्सव' का भव्य शुभारंभ होने जा रहा है। श्री प्रेम प्रकाश मंडल के संस्थापक आचार्य श्री सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज की स्मृति में आयोजित होने वाला यह पावन ४० दिवसीय चालीहा अनुष्ठान 9 जून मंगलवार से प्रारंभ होकर 19 जुलाई 2026 रविवार यानी "सदगुरु टेऊँराम जयंती" तक पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। आस्था के इस महाकुंभ को लेकर देश-विदेश के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

इस पावन धार्मिक आयोजन के अंतर्गत 9 जून मंगलवार को प्रातः काल ठीक 6 बजे श्री अमरापुर के 'श्री मंदिर' में प्रख्यात विद्वान पंडितों एवं परम पूज्य संत-महात्माओं के पावन सान्निध्य में श्री विग्रहों की विशेष पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ चालीहे महोत्सव का विधिवत श्रीगणेश किया जाएगा। इस आलौकिक और विशेष पूजा-अर्चना में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर रोली-मोली का रक्षा सूत्र (कलावा) बंधवाएंगे और अपने चालीस दिनों के कड़े चालीहा अनुष्ठान का संकल्प लेंगे। इस विषय में विस्तृत जानकारी देते हुए पूज्य स्वामी मोहन लाल जी महाराज ने बताया कि चालीहा व्रत का संकल्प लेने वाले सभी भक्तों के लिए मंगलवार को प्रातः 6 बजे होने वाली इस विशेष पूजा में सम्मिलित होना पूरी तरह अनिवार्य है। इसके साथ ही रक्षा सूत्र बंधवाना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि इस पवित्र रक्षा सूत्र को पूरे चालीस दिनों के कड़े नियमों के उपरांत ४०वें दिन पूर्ण आहुति के समय ही खोला जाएगा।

इस भव्य महोत्सव के दौरान पूरे ४० दिनों तक श्री मंदिर एवं पावन समाधि स्थल पर नित्य प्रतिदिन ऋतु पुष्पों से अलौकिक और मनमोहक दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। आध्यात्मिक जागृति के इस महोत्सव में प्रतिदिन प्रातः काल 6 बजे से 6:40 बजे तक यानी पूरे 40 मिनट तक विश्व शांति और आत्मकल्याण के लिए पावन हवन यज्ञ अनुष्ठान संपन्न होगा। इसके अतिरिक्त श्री अमरापुर दरबार में प्रतिदिन सुबह और शाम दोनों समय सामूहिक रूप से चालीसा का पाठ, दिव्य प्रार्थना, मधुर भजन, सत्संग एवं "सदगुरु टेऊँराम कीर्तन" का आयोजन किया जाएगा, जिससे संपूर्ण परिसर भक्तिमय ऊर्जा से सराबोर रहेगा।

चालीहा साहब का कठिन व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुछ कड़े एवं अनिवार्य नियमों का निर्धारण किया गया है, जिनका श्रद्धापूर्वक पालन करना अनिवार्य होगा। इन नियमों के अनुसार, व्रतधारी भक्तों को प्रतिदिन अपने घर में सुबह और शाम दोनों समय चालीसा का पाठ तथा आरती संपन्न करनी होगी। संपूर्ण चालीस दिनों तक भक्तों को केवल एक समय ही भोजन प्रसादी ग्रहण करनी होगी, अथवा वे शनिवार का विशेष व्रत रख सकते हैं। इसके साथ ही शनिवार और चौथ के पावन अवसर पर डोडा चटनी का विशेष प्रसाद चढ़ाना अनिवार्य होगा। पवित्रता बनाए रखने के लिए इन चालीस दिनों के दौरान मांस, मछली, अंडा, शराब और जुआ आदि जैसे सभी निषिद्ध और तामसिक पदार्थों से पूरी तरह दूर रहना होगा। श्रद्धालुओं के लिए श्री अमरापुर दरबार में नित्य आयोजित होने वाले सामूहिक चालीहा पाठ और सत्संग में सहभागिता करना भी आवश्यक किया गया है।

इस अलौकिक अनुष्ठान का भव्य समापन 19 जुलाई को "सदगुरु टेऊँराम जयंती" के पावन अवसर पर होगा। इस दिन सुबह 6 बजे सभी व्रतधारी श्रद्धालु ब्राह्मण के हाथों से अपनी कलाई पर बंधा मोली (रक्षा सूत्र) उतरवाएंगे और तुलसी पत्र ग्रहण कर अपने इस कड़े चालीहा अनुष्ठान को पूर्ण करेंगे। इसी समापन दिवस पर सभी भक्तों को अपने-अपने घरों में २४ घंटे की अखंड ज्योत प्रज्वलित करनी होगी। पूज्य संतों द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जो श्रद्धालु इन सभी कठिन नियमों का पूर्ण निष्ठा से पालन करने में सक्षम हैं, वही इस परम फलदायी "सदगुरु टेऊँराम चालीहा महोत्सव व्रत" अनुष्ठान को धारण कर सकते हैं। यह महोत्सव जयपुर के धार्मिक इतिहास में आध्यात्मिक चेतना और लोक कल्याण का एक नया अध्याय लिखेगा।

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