रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शकूरबस्ती रेल डिपो का किया औचक निरीक्षण
रेल मंत्री ने तिलक ब्रिज से शकूरबस्ती तक विकास कार्यों की समीक्षा की और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों को दिए निर्देश।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव उत्तर रेलवे के शकूरबस्ती डिपो में रेल कर्मचारियों से संवाद करते हुए और विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए।
भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और रेलकर्मियों के कल्याण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए माननीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज उत्तर रेलवे के तिलक ब्रिज से शकूरबस्ती रेल सेक्शन का व्यापक और सघन निरीक्षण किया। इस उच्च स्तरीय दौरे के दौरान रेलमंत्री ने उत्तर रेलवे के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की, जिसमें क्षेत्र की विभिन्न विकास योजनाओं, अवसंरचनात्मक प्रगति और आगामी रेल परियोजनाओं के कार्यों की विस्तृत एवं बिंदुवार समीक्षा की गई।
निरीक्षण की इस कड़ी में रेलमंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने सीधे शकूरबस्ती डिपो का रुख किया, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों, मेंटेनेंस स्टाफ और अन्य तकनीकी रेलकर्मियों से सीधे तौर पर संवाद स्थापित कर सबको चौंका दिया। एक बेहद आत्मीय, संवेदनशील और सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुए इस सीधे संवाद के दौरान रेलमंत्री ने ग्राउंड जीरो पर काम करने वाले कर्मचारियों के अनुभवों को बेहद ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी सुगम रेल संचालन सुनिश्चित करने वाले तकनीकी स्टाफ की पीठ थपथपाकर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके दैनिक कार्य संपादन में आने वाली व्यावहारिक परेशानियों व जटिल समस्याओं को गहराई से समझा।
कर्मचारियों के प्रति अपनी चिरपरिचित संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए माननीय मंत्री ने बिना किसी प्रशासनिक विलंब के, मौके पर ही मौजूद उत्तर रेलवे के वरिष्ठ रेल अधिकारियों को इन समस्याओं पर पूरी गंभीरता से गौर करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सभी व्यावहारिक दिक्कतों के त्वरित, समयबद्ध और ऑन-द-स्पॉट निवारण (On-the-spot resolution) के लिए कड़े प्रशासनिक आदेश जारी कर तत्काल प्रभाव से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा। रेलमंत्री के इस औचक एवं संवेदनशील कदम ने न केवल रेल डिपो के कर्मचारियों में अभूतपूर्व ऊर्जा का संचार किया है, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि शीर्ष स्तर पर बैठे नेतृत्व के लिए अंतिम छोर पर तैनात रेलकर्मी की सुरक्षा और सुगमता सर्वोपरि है।