नए एफडीआई नियमों से 1.8 करोड़ एमएसएमई को वैश्विक बाजार का रास्ता, ई-कॉमर्स निर्यात को बड़ी राहत
एफडीआई नियमों में बदलाव के बाद 'मेक इन इंडिया' उत्पादों के ई-कॉमर्स निर्यात को नई गति मिलने की उम्मीद है। जानिए कैसे 1.8 करोड़ एमएसएमई को मिलेगा वैश्विक बाजार तक पहुंच का अवसर।
भारत के 'मेक इन इंडिया' उत्पादों के इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स निर्यात को अनुमति देने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों में किए गए बदलाव का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीतिगत सुधार देश के करीब 1.8 करोड़ विनिर्माण एमएसएमई के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान बनाएगा और विकसित भारत के तहत 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एम्पावर इंडिया के अनुसार, नई नीति के तहत एफडीआई समर्थित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारतीय निर्माता सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेंगे। इससे वस्त्र, हस्तशिल्प, मसाले, आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद तथा अन्य निर्यातोन्मुख क्षेत्रों से जुड़े एमएसएमई को विशेष लाभ मिलने की संभावना है।
एम्पावर इंडिया के महानिदेशक के. गिरी ने कहा कि अब तक छोटे निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती वैश्विक बाजारों तक पहुंच और निर्यात अवसंरचना की कमी थी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत सीमा-पार लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और अंतरराष्ट्रीय वितरण जैसी सुविधाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध होंगी, जिससे छोटे उद्योगों के लिए निर्यात प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और तमिलनाडु जैसे प्रमुख विनिर्माण राज्यों के एमएसएमई इस नीति से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। उनका कहना है कि इससे छोटे उद्योगों की वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी बढ़ेगी और उनकी निर्यात क्षमता का विस्तार होगा।
हाई पीक स्ट्रेटेजी एलएलसी के संस्थापक डॉ. स्पेंसर कोहेन ने कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म छोटे निर्माताओं और वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच प्रभावी सेतु का कार्य कर सकते हैं। उनके अनुसार, यह नीतिगत बदलाव भारतीय एमएसएमई के लिए विदेशी बाजारों में प्रवेश की लागत और उससे जुड़ी जटिलताओं को कम करेगा।
इंडिया एसएमई फोरम के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि अधिकांश एमएसएमई के सामने उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि निर्यात बाजारों तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्होंने कहा कि नई नीति उन्हें तैयार निर्यात अवसंरचना का लाभ उठाने का अवसर देगी और अधिक उद्यमों को निर्यातक बनने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर विश्वनाथ पिंगली ने कहा कि यह नीतिगत बदलाव भारतीय एमएसएमई को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं, इंडसलॉ की पार्टनर श्रेया सूरी ने कहा कि इस नीति की सफलता के लिए स्पष्ट कार्यान्वयन दिशा-निर्देश और प्रभावी अनुपालन व्यवस्था आवश्यक होगी।
एम्पावर इंडिया का कहना है कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और डिजिटल निर्यात चैनलों के विस्तार के साथ यह सुधार भारतीय निर्माताओं को वैश्विक उपभोक्ताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संगठन के अनुसार, इससे देश के निर्यात आधार को मजबूत करने और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।