तस्वीर में जयपुर में आयोजित 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, जितिन प्रसाद और अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधि मंच पर खड़े दिखाई दे रहे हैं।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत 7 अगस्त 2026 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के उद्योग मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मंत्री-स्तरीय बैठक ने न्यू इंडस्ट्रियल रिवॉल्यूशन पर ब्रिक्स साझेदारी (PartNIR) के तहत सहयोग और औद्योगिक संवाद को नया आयाम प्रदान किया।

“सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” विषय पर आयोजित इस बैठक में सदस्य देशों ने औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत बनाने, तकनीकी बदलावों को अपनाने और सहयोगात्मक प्रयासों के नए अवसरों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। बैठक ने औद्योगिक विकास को गति देने और सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए साझा मंच उपलब्ध कराया।

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने प्रतिनिधियों का जयपुर में स्वागत किया। उन्होंने जयपुर को ऐसा शहर बताया, जो सदियों पुरानी शिल्प परंपरा को आधुनिक औद्योगिक अर्थव्यवस्था की आकांक्षाओं के साथ सहज रूप से जोड़ता है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में आकांक्षाओं को व्यावहारिक नवाचार और सहयोग में बदलना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ब्रिक्स देशों को अपनी पूरक क्षमताओं का उपयोग करते हुए मजबूत और आत्मनिर्भर उद्योग विकसित करने चाहिए तथा नई औद्योगिक क्रांति के लिए ब्रिक्स साझेदारी (PartNIR) इस सहयोग का प्रमुख माध्यम बन चुकी है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच मजबूत औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सहयोग, नवाचार और आपसी विश्वास ही मजबूत, सतत और समावेशी औद्योगिक भविष्य के निर्माण का आधार हैं।

श्री पीयूष गोयल ने कहा कि ब्रिक्स की यात्रा वर्ष 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित पहले शिखर सम्मेलन से शुरू हुई थी। उन्होंने वर्ष 2025 की अध्यक्षता के दौरान ब्राजील के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत इस विरासत को निरंतर, सक्रिय और व्यावहारिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता का उद्देश्य निरंतरता बनाए रखते हुए व्यवसायों, निवेशकों और नवोन्मेषकों के बीच विश्वास को मजबूत करना तथा ऐसा व्यावहारिक सहयोग बढ़ाना है, जिससे सभी ब्रिक्स सदस्य देशों को ठोस परिणाम मिल सकें।

केंद्रीय मंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान PartNIR के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि भारत द्वारा निर्धारित चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एडवाइजरी ग्रुप और वर्किंग ग्रुप्स के माध्यम से व्यापक चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए स्थायी संस्थागत तंत्र विकसित करना है। उन्होंने बताया कि एसएमई वर्किंग ग्रुप में सहयोग के लिए फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया गया, फोटोवोल्टिक उद्योग पर वर्किंग ग्रुप के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ और एक्शन प्लान अपनाया गया तथा स्टार्टअप्स द्वारा नवाचार-आधारित विकास के लिए एक्शन प्लान को भी अंतिम रूप दिया गया। इसके साथ ही उद्योग-संबंधी मजबूत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्रणाली विकसित करने के महत्व पर बल दिया गया, जिसमें जीआईएस-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और सिटी लॉजिस्टिक्स प्लानिंग को प्रमुखता दी गई।

बैठक का एक प्रमुख परिणाम ‘10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक के संयुक्त घोषणापत्र’ को स्वीकार किया जाना रहा। यह घोषणापत्र केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सहयोग के व्यावहारिक उपायों को लागू करने की सदस्य देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जिसका उद्देश्य उद्योगों को सशक्त बनाना और लोगों के जीवन में सुधार लाना है।

बैठक के दौरान ब्रिक्स सदस्य देशों के उद्योग मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों ने औद्योगिक विकास को लेकर अपनी-अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, प्रमुख नीतिगत पहलों और उपलब्धियों की जानकारी साझा की। इन बयानों में औद्योगिक क्षमताओं को मजबूत करने, डिजिटल और तकनीकी बदलावों को गति देने, सतत एवं समावेशी औद्योगिक वातावरण विकसित करने तथा साझा विकास संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने PartNIR को व्यावहारिक सहयोग, ज्ञान साझा करने, क्षमता विकास और औद्योगिक नवाचार को आगे बढ़ाने के प्रमुख मंच के रूप में दोहराया। प्रतिनिधिमंडलों ने भारत की वर्ष 2026 की अध्यक्षता में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि PartNIR के तहत शुरू की गई पहलें संस्थागत सहयोग को मजबूत करेंगी, नवाचार को बढ़ावा देंगी और ब्रिक्स देशों में भविष्य के अनुरूप प्रतिस्पर्धी उद्योगों के विकास में सहायक होंगी।

इसी क्रम में भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 3 और 4 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर ब्रिक्स संपर्क समूह (सीजीईटीआई) की तीसरी बैठक के बाद 7 अगस्त 2026 को जयपुर, राजस्थान में 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक (टीएमएम) का भी आयोजन कर रहा है। इस मंत्री-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल करेंगे, जबकि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल भी इसमें भाग लेंगे। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के व्यापार मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को एक मंच पर लाएगी।

“सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण” विषय के अंतर्गत ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर तीसरे कॉन्टैक्ट ग्रुप (सीजीईटीआई) के तहत हुई चर्चाएं बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमएसएमई की भागीदारी बढ़ाने, मजबूत एवं विविध ग्लोबल वैल्यू चेन को प्रोत्साहित करने और सीमा-पार डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने पर केंद्रित रहीं।

व्यापार मंत्री-स्तरीय चर्चाओं के दौरान आमंत्रित मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल जयपुर के सिटी पैलेस और हवा महल का सांस्कृतिक भ्रमण भी करेंगे, जहां भारत की समृद्ध विरासत और परंपराओं का परिचय कराया जाएगा। वहीं तकनीकी सत्रों के दौरान मंत्रियों को ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने संबंधी अपने विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।

ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। यह बैठक विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) को केंद्र में रखते हुए खुली, समावेशी, पारदर्शी, न्यायसंगत और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है। साथ ही यह चर्चा मजबूत सप्लाई चेन, नवाचार-आधारित विकास, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एमएसएमई की प्रभावी भागीदारी और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच गहरे आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित कर भारत के ‘विकसित भारत@2047’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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