ब्यावर पुलिस का बड़ा खुलासा: क्रिप्टो और हवाला की आड़ में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का नेटवर्क ध्वस्त
ब्यावर पुलिस ने साइबर ठगी की रकम को ई-मित्र खातों से नकदी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजने वाले गिरोह के 4 आरोपी पकड़े।
ब्यावर पुलिस ने साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का दुरुपयोग करने वाले गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक जांच में आरोपियों के तार विदेश में बैठे साइबर ठगों के समूह से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। गिरोह ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों के खातों में साइबर ठगी की रकम डलवाकर कमीशन काटता और नकद राशि लेकर उसे क्रिप्टोकरेंसी तथा हवाला के जरिए विदेश भेजता था।
महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार की गई इस कार्रवाई में आरोपियों के नेटवर्क और साइबर ठगी की रकम को खपाने के तरीके का खुलासा हुआ है। अतिरिक्त महानिदेशक साइबर क्राइम श्री वी.के. सिंह तथा अजमेर रेंज महानिरीक्षक डॉ. रवि सभरवाल के मार्गदर्शन में ब्यावर जिले में साइबर अपराधियों और बैंक खातों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिला विशेष टीम, थाना जवाजा और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
मामले की शुरुआत थाना जवाजा में ई-मित्र संचालक तुलसा सिंह की रिपोर्ट से हुई। सारोठ चौराहा स्थित उसकी ई-मित्र दुकान पर 28 अगस्त को तीन युवक थार वाहन से पहुंचे थे। इनमें रितिक नामक युवक को दुकान पर काम करने वाला यश पहले से जानता था। युवकों ने नकद राशि उपलब्ध होने के बारे में पूछा और ई-मित्र लेनदेन में इस्तेमाल होने वाला क्यूआर कोड ले लिया।
कुछ समय बाद ई-मित्र संचालक के खाते में ज्योति कुमारी के नाम से 30 हजार रुपये आए। संचालक ने 300 रुपये कमीशन काटकर युवकों को 29,700 रुपये नकद दे दिए। इसके बाद सुशीला के नाम से 50 हजार रुपये खाते में आए। इसमें से 500 रुपये कमीशन काटकर 49,500 रुपये नकद दे दिए गए।
अगले दिन खाते पर दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा की ओर से रोक लगा दी गई। बैंक से जानकारी लेने पर पता चला कि खाते में साइबर धोखाधड़ी की रकम जमा हुई थी। इसके बाद थाना जवाजा में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान जिला विशेष टीम, साइबर टीम और जवाजा थाना पुलिस ने संदिग्धों को एक स्विफ्ट कार में घूमते हुए पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक एप के माध्यम से विदेश में बैठे अज्ञात साइबर ठगों के समूह से जुड़े हुए हैं।
पुलिस जांच के अनुसार, साइबर ठग भारतीय लोगों को धमकी, लालच अथवा निवेश का झांसा देकर रकम ऐसे खातों में जमा करवाते हैं, जिनका इस्तेमाल आगे गिरोह के सदस्य करते हैं। आरोपियों को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी के बदले निर्धारित मूल्य से करीब 25 प्रतिशत अतिरिक्त राशि मिलने की बात भी सामने आई है।
गिरोह के सदस्य ऐसे ई-मित्र और पेट्रोल पंप संचालकों की तलाश करते थे, जहां डिजिटल लेनदेन के बाद नकद राशि उपलब्ध हो सके। वे संबंधित संचालकों से क्यूआर कोड लेकर उनके खातों में साइबर ठगी की रकम डलवाते और कमीशन काटकर नकदी प्राप्त कर लेते थे।
पीड़ित की शिकायत के बाद जब बैंक खाता रोक दिया जाता था, तब खाते के वास्तविक संचालक को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। इस तरह साइबर ठगी की रकम को नकदी में बदलने के लिए आम लोगों के खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
जांच में यह भी सामने आया कि प्राप्त नकदी से क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी खरीदी जाती थी। इसके बाद इसे डिजिटल माध्यम से विदेश में बैठे साइबर ठगों तक पहुंचाया जाता था। पुलिस को आशंका है कि इसी माध्यम से विदेश से संचालित साइबर ठगी और हवाला कारोबार के बीच धन का लेनदेन भी किया जा रहा था।
पुलिस ने मामले में अजमेर निवासी पेशे से मजदूर राजवीर सिंह चौहान उर्फ रोहित (24), रितिक मंडोलिया (23), त्रिलोक रेगर (23) और व्यापारी चिराग मुलचंदानी (26) को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से साइबर ठगी के नेटवर्क, इस्तेमाल किए गए खातों, क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन और विदेश में बैठे साइबर अपराधियों से संबंधों के बारे में पूछताछ की जा रही है। जांच में सामने आए इस नेटवर्क ने साइबर ठगी की रकम को खातों से नकदी और फिर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश तक पहुंचाने की पूरी कड़ी को उजागर किया है।