आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से बदली राजस्थान की स्वास्थ्य तस्वीर, 11 हजार से ज्यादा केंद्र सक्रिय
राजस्थान में 11 हजार से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर सक्रिय, टेलीमेडिसिन, दवा और जांच सुविधाओं से बदल रही गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था।
तस्वीर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राजस्थान सचिवालय में बैठक के दौरान नजर आ रहे हैं।
राजस्थान में गांव-ढाणी तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में आयुष्मान आरोग्य मंदिर महत्वपूर्ण बदलाव का माध्यम बनकर उभरे हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से प्रदेश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है, जिससे अब लोगों को सामान्य इलाज से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श तक कई सुविधाएं अपने घर के नजदीक मिल रही हैं।
जयपुर, 27 जुलाई। राजस्थान में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार किया जा रहा है। पहले सामान्य बीमारी के उपचार के लिए भी ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को कई किलोमीटर दूर अस्पतालों तक जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव और मोहल्ले के पास ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के स्वास्थ्य, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, मानसिक स्वास्थ्य, बुजुर्गों की देखभाल, टेलीमेडिसिन, आवश्यक जांच और दवाओं जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति-2017 के अनुरूप देशभर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में गांव-ढाणी तक स्वास्थ्य सेवाओं के स्वरूप में बदलाव देखने को मिल रहा है।
प्रदेश में 18 हजार 436 स्वास्थ्य संस्थानों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इनमें से अब तक करीब 11 हजार 500 आयुष्मान आरोग्य मंदिर पूरी तरह क्रियाशील किए जा चुके हैं, जबकि शेष संस्थानों को चरणबद्ध रूप से शुरू किया जा रहा है। वर्तमान में राज्य में 8,370 उप स्वास्थ्य केंद्र, 2 हजार 107 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 286 शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र एवं 728 शहरी जनता क्लिनिक को आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में विकसित कर नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रशिक्षित कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ), एएनएम, स्टाफ नर्स और आशा कार्यकर्ताओं की टीम सातों दिन लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही है। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को मिल रहा है, जिन्हें अब छोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए जिला अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं।
इन केंद्रों पर कॉम्प्रीहेंसिव प्राइमरी हेल्थ केयर के तहत 12 प्रकार की विस्तृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं एवं प्रसव संबंधी सेवाएं, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोर स्वास्थ्य, परिवार नियोजन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, संक्रामक रोगों का उपचार, सामान्य ओपीडी सेवाएं, मधुमेह और उच्च रक्तचाप सहित गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, आंख-कान-नाक एवं गला संबंधी सेवाएं, मुख स्वास्थ्य सेवाएं, जीरियाट्रिक एवं पेलिएटिव केयर, आपातकालीन प्राथमिक उपचार और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्क्रीनिंग एवं उपचार जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
मरीज गांव में, विशेषज्ञ डॉक्टर स्क्रीन पर
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से टेलीमेडिसिन सेवाओं को भी विस्तार मिला है। ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण सुविधा साबित हो रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों से डिजिटल माध्यम से जोड़ा गया है।
इस व्यवस्था के तहत मरीजों को अपने गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर ही विशेषज्ञ चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श मिल रहा है। इससे अनावश्यक यात्रा, समय और खर्च में कमी आई है। राज्य में अब तक 31 लाख से अधिक लोगों ने टेलीमेडिसिन सेवाओं का लाभ लिया है।
स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में भी अहम भूमिका
आयुष्मान आरोग्य मंदिर केवल उपचार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी जागरूक कर रहे हैं। राज्यभर में अब तक इन केंद्रों पर 44.49 लाख से अधिक वेलनेस सत्रों का आयोजन किया जा चुका है।
इन वेलनेस सत्रों, स्वास्थ्य मेलों और विशेष स्वास्थ्य दिवसों के माध्यम से योग, पोषण, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों से लगभग 4 करोड़ नागरिक लाभान्वित हुए हैं।
दवाइयां और जांच सुविधाएं भी उपलब्ध
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर लोगों को 121 प्रकार की आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के ई-औषधि सॉफ्टवेयर के माध्यम से दवाओं की ऑनलाइन उपलब्धता और आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।
इसी प्रकार इन केंद्रों पर 14 प्रकार की आवश्यक जांच सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इनमें हीमोग्लोबिन, गर्भावस्था जांच, ब्लड शुगर, मलेरिया, डेंगू, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफिलिस, मूत्र जांच, पानी एवं नमक की गुणवत्ता जांच, सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग सहित अन्य आवश्यक जांच शामिल हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से मजबूत हो रहा जनस्वास्थ्य तंत्र
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को अस्पताल-केंद्रित व्यवस्था से निकालकर समुदाय आधारित व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाया है। अब लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ रही है। स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध होने से बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार संभव हो रहा है।
राजस्थान में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का विस्तार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बड़े अस्पतालों से निकलकर आमजन के घरों के नजदीक पहुंच रहा है। सुलभ और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं की यह व्यवस्था प्रदेश में जनस्वास्थ्य के नए मानक स्थापित कर रही है।