अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में राज्यपाल बागडे बोले- व्यक्ति नहीं, संस्था थे
जयपुर में विश्व हिन्दू परिषद के श्री अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में राज्यपाल हरिभाऊ बागडे शामिल हुए। उन्होंने अशोक सिंघल को संस्था बताते हुए सनातन धर्म, राष्ट्र सेवा और सामाजिक समता के कार्यों को याद किया।
तस्वीर में जयपुर में आयोजित समारोह के दौरान राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे और अन्य गणमान्य व्यक्ति दीप प्रज्वलित करते हुए नजर आ रहे हैं।
जयपुर, 26 सितंबर। विश्व हिन्दू परिषद द्वारा शनिवार को श्री अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। समारोह में राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे सम्मिलित हुए और उन्होंने अशोक सिंघल की स्मृति को नमन करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को अनुकरणीय बताया।
राज्यपाल श्री बागडे ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल व्यक्ति नहीं, अपने आप में संस्था थे। सनातन संस्कृति के जीवन मूल्यों से जुड़ा उनका पूरा जीवन सनातन धर्म, राष्ट्र सेवा और समाज को एकजुट करने के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल का जीवन भारतीय संस्कारों में गूंथा हुआ था और वेद तथा उपनिषदों के भाष्य से भी जुड़ा था। उनका मानना था कि हिन्दू संस्कृति जीवन का आलोक पथ है। इस संस्कृति के मर्म में जाने पर नैतिकता, दूसरों के प्रति सम्मान और उदारता के भाव मनुष्य में अपने आप पैदा होते हैं। राज्यपाल ने अशोक सिंघल को असाधारण व्यक्तित्व बताया।
श्री बागडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपने जीवन से सदा लोगों को प्रेरित किया। उनका आदर्श था कि यदि एक संत एक समय में एक गांव को अपना ले, तो इस देश में गरीबी और अज्ञानता का नाश हो जाएगा। उन्होंने हिन्दू समाज से छुआछूत और सामाजिक असमानता को मिटाने के प्रयासों के तहत साधु-संतों को भी अपने इस विचार में सहभागी बनाया।
राज्यपाल ने अशोक सिंघल द्वारा छुआछूत मिटाने, समता के प्रसार और सनातन संस्कृति के प्रसार के लिए किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। समारोह में उनके व्यक्तित्व, विचारों और सामाजिक कार्यों को स्मरण करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही गई।