अजमेर जिले में नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म की झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में पॉक्सो अदालत के विशिष्ट न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता महिला को 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले की जांच के दौरान नाबालिग ने घटना से ही इनकार कर दिया था, जिसके बाद प्रकरण झूठा पाया गया।

शिकायतकर्ता महिला ने अपनी नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि पड़ोसी नाबालिग को खेत में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।

मामले की पुलिस जांच के दौरान पीड़िता ने घटना से ही इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने प्रकरण में एफआर पेश की, जिसे न्यायालय ने 8 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया।

एफआर स्वीकार होने के बाद जांच अधिकारी ने शिकायतकर्ता महिला के विरुद्ध इस्तगासा पेश किया। इस पर न्यायालय ने संज्ञान लिया और मामले की सुनवाई की।

न्यायालय ने माना कि महिला ने भूमि विवाद के कारण अपनी नाबालिग पुत्री को माध्यम बनाकर पड़ोसी के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। न्यायालय के अनुसार, महिला का उद्देश्य पड़ोसी को धमकाना और अपमानित करना था।

हालांकि, न्यायालय ने शिकायतकर्ता की ग्रामीण, अनपढ़ एवं वृद्ध महिला की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उसे 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। इस फैसले के साथ झूठी दुष्कर्म रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में न्यायालय ने शिकायतकर्ता की भूमिका पर कानूनी कार्रवाई पूरी की।

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