राजस्थान में झूठी एफआईआर पर सख्त कार्रवाई, 75 दोषियों को सजा

झूठी कहानियों से पुलिस को गुमराह करने वालों के खिलाफ राजस्थान पुलिस ने अभियान छेड़ा है। एक माह में 1870 मामलों में कोर्ट ने संज्ञान लिया है।

Update: 2026-07-02 13:30 GMT

राजस्थान में निजी रंजिश और बदले की भावना से प्रेरित होकर पुलिस और कानून को गुमराह करने वालों के लिए अब बचना नामुमकिन हो गया है। राज्य में बलात्कार, लूट जैसे संगीन अपराधों की झूठी कहानियां गढ़कर निर्दोष नागरिकों को फंसाने और पुलिस तंत्र का दुरुपयोग करने वाले समाजकंटकों के विरुद्ध राजस्थान पुलिस ने एक व्यापक विधिक अभियान छेड़ दिया है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के कड़े निर्देशों के अनुपालन में पुलिस मुख्यालय ने झूठी शिकायतों के मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की है, जिसके परिणाम स्वरूप महज एक महीने के भीतर 75 दोषियों को न्यायालय द्वारा जेल और आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध) बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि 1 जून से 28 जून 2026 के बीच पूरे प्रदेश में पुलिस की मजबूत पैरवी का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। अदालतों ने न केवल 75 मामलों में फैसला सुनाकर दोषियों को दंडित किया है, बल्कि पुलिस की मुस्तैदी के चलते 1,870 ऐसे प्रकरणों में संज्ञान भी लिया गया है, जिनमें झूठी शिकायतें दर्ज कराने वालों के विरुद्ध अब विधिवत कानूनी कार्रवाई और ट्रायल शुरू होगा। पुलिस द्वारा की गई गहन तफ्तीश के बाद जब मामले झूठे पाए गए, तो रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की गई, जिसके आधार पर यह कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।

इस अभियान के तहत प्रदेश के कई जिलों ने उत्कृष्ट कार्य किया है। झूठी कहानियां गढ़ने वालों को कानून के कठघरे में खड़ा करने में नागौर जिला अव्वल रहा, जहाँ जून माह में 292 नए मामलों पर अदालत ने संज्ञान लिया। इसी क्रम में जयपुर ग्रामीण 247 प्रकरणों के साथ दूसरे और अलवर 212 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। इसके अतिरिक्त जयपुर दक्षिण, कोटपूतली-बहरोड़, हनुमानगढ़, जयपुर पश्चिम और जयपुर उत्तर में भी दर्जनों ऐसे मामलों पर कानूनी शिकंजा कसा गया है।

सजा और जुर्माने के आंकड़ों पर गौर करें तो हनुमानगढ़ पुलिस ने अपनी प्रभावी पैरवी के दम पर रिकॉर्ड 18 मामलों में दोषियों को सजा दिलाई है, जबकि प्रतापगढ़ में 9 और जयपुर ग्रामीण में 6 मामलों में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों को दंडित किया है। इन मामलों में कोटा शहर, अलवर, बांसवाड़ा, ब्यावर, सवाई माधोपुर, धौलपुर, झुंझुनू, डूंगरपुर, सिरोही, झालावाड़, भीलवाड़ा, बीकानेर और चूरू जैसे जिले भी शामिल रहे हैं।

अक्सर देखा गया है कि जमीन विवाद, पैसों के लेनदेन या आपसी दुश्मनी के चलते लोग पुलिस का गलत इस्तेमाल करते हैं, जिससे न केवल पुलिस का मूल्यवान समय नष्ट होता है, बल्कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में भी अनावश्यक देरी होती है। पुलिस मुख्यालय ने इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी व्यक्ति झूठे साक्ष्य गढ़ता है या मनगढ़ंत एफआईआर दर्ज कराता है, तो उसके खिलाफ त्वरित ट्रायल के जरिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस की यह सख्त पहल राज्य में कानून-व्यवस्था की विश्वसनीयता को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

Tags:    

Similar News