तस्वीर में एक यात्री रेलवे स्टेशन पर लगे वाटर बूथ के नल से पानी पीता हुआ दिखाई दे रहा है।

नई दिल्ली। यात्रियों को स्टेशनों पर सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए भारतीय रेलवे ने पूरे नेटवर्क में विशेष सफाई और कीटाणुशोधन अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत जल आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाओं की व्यापक जांच के साथ आवश्यक मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा।

इस अभियान के तहत क्षेत्रीय रेलवे जल स्रोतों, उपचार एवं फिल्ट्रेशन संयंत्रों, भूमिगत और ओवरहेड टैंकों, पीवीसी टैंकों, वाटर बूथ, नलों और अन्य जल वितरण केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। जांच के दौरान क्षतिग्रस्त टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर मिलने पर आवश्यकतानुसार उनकी मरम्मत की जाएगी या उन्हें बदला जाएगा।

अधिकारी जल आपूर्ति व्यवस्था में रिसाव की भी जांच करेंगे। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पेयजल और गैर-पेयजल प्रणालियों के बीच किसी तरह का क्रॉस-कनेक्शन न हो। रेलवे बोर्ड ने वाटर कूलर, यूवी/आरओ जल शोधन प्रणालियों और वॉटर वेंडिंग मशीनों की विशेष जांच के निर्देश भी दिए हैं।

जांच के दौरान जरूरत के अनुसार इन उपकरणों की नियमित सर्विसिंग की जाएगी और फिल्टर तथा अन्य आवश्यक घटकों को बदला जाएगा। इससे जल शोधन और वितरण से जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर स्थिति में बनाए रखने पर जोर रहेगा।

क्षेत्रीय रेलवे को अभियान के तहत सामने आई कमियों और उनके समाधान के लिए की गई कार्रवाई का स्टेशनवार विवरण प्रस्तुत करना होगा। यह अभियान केवल स्टेशनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों में उपलब्ध पेयजल सुविधाओं को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है।

भारतीय रेलवे की इस पहल का उद्देश्य जल गुणवत्ता की निगरानी, नियमित रखरखाव और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करना है, ताकि यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों के लिए सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

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