तस्वीर में अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयोग किए जाने वाले भारतीय प्रक्षेपण यान, सेमीकंडक्टर चिप्स और चंद्रमा की सतह को दर्शाया गया है। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।

नेशनल स्पेस डे पर भारत की अंतरिक्ष यात्रा के साथ उन स्वदेशी तकनीकों को भी रेखांकित किया जा रहा है, जो देश के अंतरिक्ष अभियानों को मजबूती दे रही हैं। उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों से लेकर चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 तक, भारत में निर्मित चिप्स देश के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की यात्रा को नई गति मिली है। महत्वपूर्ण और उन्नत तकनीकों में स्वदेशी क्षमताओं का विकास आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत कर रहा है। इसमें भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र भी शामिल है।

मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (SCL) उपग्रहों और प्रक्षेपण यानों के लिए फ्लाइट-ग्रेड चिप्स विकसित करती है। इन चिप्स को अंतरिक्ष की चरम परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार किया जाता है। SCL द्वारा विकसित तकनीकों में रेडिएशन-हार्डेंड चिप्स, दबाव, त्वरण, तापमान और ध्वनिक सेंसर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल CCD/CMOS इमेजर तथा कस्टम ASICs शामिल हैं।

चंद्रयान-3 के लैंडर में SCL मोहाली द्वारा विकसित भारत में निर्मित कैमरा चिप भी लगी थी। इस चिप ने लैंडर की इमेजिंग प्रणालियों को सहयोग दिया। वहीं, SCL का विक्रम प्रोसेसर उपग्रह प्रक्षेपण यानों और रॉकेटों में इस्तेमाल किया जाता है।

भारत के सूर्य अध्ययन मिशन आदित्य-L1 में भी SCL द्वारा विकसित रेडिएशन-हार्डेंड ADC चिप्स का इस्तेमाल किया गया है। इस तरह चंद्रमा से लेकर सूर्य तक भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीकें देश के अंतरिक्ष अभियानों को समर्थन दे रही हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्पेस-ग्रेड सेमीकंडक्टर तकनीकों को विकसित करने की भारत की बढ़ती क्षमता तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही है। भारत जैसे-जैसे अधिक महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों की ओर बढ़ रहा है, मेड इन इंडिया चिप्स देश की अंतरिक्ष यात्रा को शक्ति देने में लगातार अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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