भारतीय रेलवे ने कहा है कि वह देशभर के सभी रेलवे जोनों में रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में आग जैसी संभावित घटनाओं की रोकथाम, तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया और राहत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बहुस्तरीय अग्नि सुरक्षा उपाय लगातार लागू कर रहा है। रेलवे का कहना है कि आग जैसी घटनाएं विभिन्न संयोगवश कारणों से हो सकती हैं, इसलिए यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशन और कोच स्तर पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

रेलवे स्टेशनों पर आग से निपटने के लिए पोर्टेबल फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही रेत और पानी से भरी फायर बाल्टियां भी रखी गई हैं ताकि आग लगने की स्थिति में उनका तत्काल उपयोग किया जा सके। भारतीय रेलवे ने अपने फ्रंटलाइन कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया है। स्टेशन मैनेजर, ट्रेन मैनेजर (गार्ड), कमर्शियल-कम-टिकट क्लर्क, लोको पायलट, असिस्टेंट लोको पायलट सहित अन्य कर्मचारियों के प्रशिक्षण मॉड्यूल में फायर फाइटिंग, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन को शामिल किया गया है।

भारतीय रेलवे आपदा प्रबंधन संस्थान (IRIDM) नियमित रूप से फायर फाइटिंग, फर्स्ट एड और ट्रॉमा मैनेजमेंट जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण आयोजित करता है। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से ट्रेन क्रू, ऑनबोर्ड स्टाफ, ट्रेन टिकट परीक्षक, एसी कोच स्टाफ और एस्कॉर्टिंग स्टाफ जैसे प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है, जो ‘गोल्डन ऑवर’ के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

रेलवे ने रेलवे स्टेशनों और कंट्रोल रूम के अधिकारियों के लिए स्पष्ट संचार प्रोटोकॉल निर्धारित किए हैं, ताकि आवश्यकता पड़ने पर निकटतम फायर ब्रिगेड, पुलिस, चिकित्सा संस्थानों, एम्बुलेंस, जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) से तुरंत संपर्क किया जा सके। इनके संपर्क नंबर संबंधित रेलवे अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं।

बड़े रेलवे स्टेशनों के रिले रूम और इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग रूम में ऑटोमैटिक फायर अलार्म लगाए जा रहे हैं। स्टेशनों पर स्टेशन मास्टर के लिए कंट्रोल फोन उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) में आग लगने की स्थिति में बिजली आपूर्ति तुरंत बंद की जा सकती है। सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) के माध्यम से आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित निकासी के निर्देश दिए जा सकते हैं।

रेलवे नियमित रूप से यात्रियों को ज्वलनशील वस्तुएं साथ न ले जाने के संबंध में जागरूक करने के लिए घोषणाएं करता है। बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के सामान की स्कैनिंग की जाती है तथा संवेदनशील अवधियों में ज्वलनशील सामग्री की ढुलाई रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। स्टेशनों की विद्युत प्रणालियों का नियमित रखरखाव किया जाता है ताकि शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना को रोका जा सके। विद्युत पैनलों में मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCBs) और मोल्डेड केस सर्किट ब्रेकर (MCCBs) का उपयोग किया जाता है तथा स्टेशनों पर आपातकालीन लाइटें उपलब्ध हैं। यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए निकास मार्ग स्पष्ट रूप से चिह्नित किए गए हैं। कोच वाटरिंग सुविधा वाले बड़े स्टेशनों पर अग्निशमन के लिए पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था है। रेलवे प्लेटफॉर्म पर खुली आग से खाना बनाने की अनुमति नहीं है और रेलवे स्टेशन व कार्यालय भवनों के सभी विद्युत प्रतिष्ठानों का नियमित ऑडिट और सुरक्षा अभियान भी संचालित किए जाते हैं।

भारतीय रेलवे ने ट्रेनों में भी डिजाइन, निर्माण, रखरखाव और संचालन के प्रत्येक चरण में अग्नि सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। सभी कोचों में कम से कम दो फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध कराए गए हैं। पावर कार और पैंट्री कार के आग की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाए गए हैं। निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार कोचों में फायर और स्मोक डिटेक्शन सिस्टम की व्यवस्था की गई है। पैंट्री कार और पावर कार में चरणबद्ध तरीके से वाटर मिस्ट प्रकार के फायर एक्सटिंग्विशर लगाए जा रहे हैं।

आग लगने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षित निकासी के लिए कोचों में इमरजेंसी विंडो उपलब्ध हैं। सीट, बर्थ, पैनल, फ्लोरिंग, इंसुलेशन और शौचालय सहित कोचों में वैश्विक अग्निरोधी मानकों के अनुरूप फायर-रिटार्डेंट सामग्री का उपयोग किया गया है। कोचों में फायर-रिटार्डेंट ई-बीम केबल लगाए गए हैं। विद्युत सर्किटों में फ्यूज, मिनिएचर सर्किट ब्रेकर (MCBs) और मोटर प्रोटेक्शन सर्किट ब्रेकर (MPCBs) जैसे बहुस्तरीय सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं ताकि विद्युत दोष या सर्ज से होने वाले नुकसान को रोका जा सके। विद्युत कैबिनेटों में एयरोसोल आधारित फायर सप्रेशन सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है।

रेलवे ने बताया कि अमृत भारत और वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों में वैश्विक मानकों के अनुरूप नई पीढ़ी की सामग्री लगाकर सुरक्षा व्यवस्थाओं का लगातार उन्नयन किया जा रहा है। सभी कोचों में "फायर नोटिस" प्रदर्शित किए जाते हैं, जिनमें यात्रियों को ज्वलनशील पदार्थ और विस्फोटक सामग्री साथ न ले जाने, धूम्रपान निषेध तथा दंड संबंधी जानकारी सहित आवश्यक "क्या करें और क्या न करें" के बारे में बताया जाता है। कोचों में खुली आग से खाना बनाने पर भी प्रतिबंध है।

वंदे भारत ट्रेन के प्रत्येक कोच में चार इमरजेंसी टॉक बैक यूनिट उपलब्ध हैं, जिनकी सहायता से यात्री आपात स्थिति में ट्रेन मैनेजर या लोको पायलट से संपर्क कर सकते हैं। प्रत्येक कोच में चार पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म बटन भी लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त, आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने के लिए यात्री एकीकृत हेल्पलाइन ‘रेल मदद’ के अंतर्गत 139 नंबर का उपयोग कर सकते हैं।

भारतीय रेलवे का कहना है कि इन सभी उपायों ने आग की घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, फिर भी किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए रेलवे पूरी तरह तैयार रहता है। किसी भी असामान्य घटना, विशेषकर आग लगने की सूचना मिलते ही प्रशिक्षित रेलवे कर्मचारी सबसे पहले मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हैं। रेलवे अपने संसाधनों, उपकरणों, चिकित्सकों और कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार और जिला प्रशासन के सहयोग से तत्काल राहत और बचाव अभियान संचालित करता है।

रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ऐसी किसी भी आपात स्थिति में भारतीय रेलवे की पहली प्राथमिकता लोगों की जान बचाना, घायलों का उपचार सुनिश्चित करना और फंसे हुए यात्रियों को तत्काल राहत उपलब्ध कराना होती है।

भारतीय रेलवे के पास पूरे रेल नेटवर्क को कवर करने के लिए 177 एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (ART), 100 उच्च क्षमता वाली 140 टन ब्रेकडाउन डीजल-हाइड्रोलिक क्रेन तथा 170 एक्सीडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट (ARME) स्केल-1 इकाइयां निर्धारित स्थानों पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, ARME स्केल-2 और दुर्घटनाओं के लिए पोर्टेबल मेडिकल किट भी चयनित स्थानों पर उपलब्ध कराए गए हैं ताकि तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। ARME स्केल-1 को पहियों पर चलने वाले अस्पताल के रूप में तैयार किया गया है, जिन्हें चिकित्सा उपकरणों, आवश्यक सामग्री और चिकित्सा कर्मियों सहित तुरंत दुर्घटनास्थल पर भेजा जाता है।

दुर्घटनाओं के दौरान आवश्यकता पड़ने पर सड़क वाहन, अर्थमूवर, एम्बुलेंस और अन्य अतिरिक्त उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसी आपात स्थितियों में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारियां पहले से निर्धारित हैं तथा उन्हें उसी अनुरूप प्रशिक्षित और अधिकृत किया गया है।

रेलवे ने बताया कि किसी भी बड़ी असामान्य घटना, जिसमें आग की घटना भी शामिल है, की सूचना मिलते ही स्थानीय जिला प्रशासन, फायर ब्रिगेड, चिकित्सा संस्थानों और पुलिस सहित संबंधित एजेंसियों को तत्काल सूचित किया जाता है। रेलवे और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए पूरे भारतीय रेलवे में आवश्यक प्रणाली और प्रोटोकॉल लागू हैं।

आपात स्थितियों, विशेषकर आग की घटनाओं से निपटने के लिए रेलवे जोनों और मंडलों की डिजास्टर मैनेजमेंट प्लान, जनरल एंड सब्सिडियरी रूल्स, एक्सीडेंट मैनुअल और ऑपरेटिंग मैनुअल में विस्तृत प्रक्रियाएं और दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं। रेलवे स्टेशनों पर निकटतम फायर स्टेशन, उनके टेलीफोन नंबर, रेलवे एवं गैर-रेलवे चिकित्सा संस्थानों, निजी चिकित्सकों और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों की सूची भी प्रदर्शित की जाती है ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सहायता मिल सके।

भारतीय रेलवे नियमित रूप से मॉक ड्रिल आयोजित करता है ताकि उसकी संपूर्ण व्यवस्था किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे। मंडलों द्वारा पूर्ण पैमाने की मॉक ड्रिल में रेलवे की सभी राहत एजेंसियों के साथ फायर ब्रिगेड, पुलिस, जिला प्रशासन, चिकित्सा सेवाएं और आपदा प्रतिक्रिया बल भी शामिल होते हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 71 फुल स्केल मॉक ड्रिल आयोजित की गईं, जिनमें अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और भावनगर मंडलों में आयोजित चार मॉक ड्रिल भी शामिल हैं।

यह जानकारी रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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