नोहर की बाड़ी वाली रामलीला में कलाकारों ने संवाद और अभिनय का प्रदर्शन किया।

नोहर में श्रीराम नवयुवक विजय नाट्य परिषद् के तत्वावधान में आयोजित बाड़ी वाली रामलीला में कुंभकरण वध और मेघनाद वध के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय, ओजस्वी संवादों और जीवंत युद्ध दृश्यों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों के माध्यम से धर्म-अधर्म के संघर्ष और सत्य की विजय को मंच पर जीवंत किया गया। मंचन में धर्म, साहस, शौर्य और मर्यादा का संदेश भी दिया गया।

19 अक्टूबर को आयोजित रामलीला में कलाकारों ने अपने अभिनय से रामायण के पात्रों के चरित्रों को जीवंत कर दिया। दर्शक दीर्घा में मौजूद रामभक्तों ने उत्साह के साथ मंचन का आनंद लिया। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में डॉ. बी.एल. कुमावत, प्रवासी अमित थिरानी और श्री हरि स्वीट्स के गणेश स्वामी उपस्थित रहे।

रामलीला के प्रति निरंतर लगाव और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव के लिए वरिष्ठ नागरिक कमलेश बेनीवाल, श्याम पंडा एवं श्रीमती दलीप कौर को रामलीला कमेटी की ओर से मंच पर सम्मानित किया गया।


मंचन में राम की भूमिका गोविंद नारायण, लक्ष्मण की भूमिका प्रेम मित्रुका, हनुमान की भूमिका किशोरी पारीक, सुग्रीव की भूमिका रोहताश सैनी, अंगद की भूमिका शिवम भोजक, विभीषण की भूमिका महेंद्र भाटी, रावण की भूमिका नारायण छिंपा, कुंभकरण की भूमिका विष्णु मित्रुका तथा मेघनाद की भूमिका रामप्रताप सोनी ने निभाई। वहीं प्राइवेट की भूमिकाओं में नंदलाल तंवर, मनोज जोशी टांटू एवं भरत बंसल ने सहयोग दिया। रामलीला कमेटी की अध्यक्ष चौथमल पांडिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।

नोहर की बाड़ी वाली रामलीला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। वर्ष 1951 से चली आ रही यह नाट्य परंपरा आज भी लोगों को भगवान श्रीराम के आदर्शों, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ रही है। रामलीला कमेटी के समर्पण और कलाकारों की साधना से यह परंपरा निरंतर जीवंत बनी हुई है।

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