नोहर गौशाला में देवांश-वसुधा पचीसिया का सम्मान, 1945 बीघा भूमि दान की विरासत कायम
नोहर की श्री गौशाला में स्वर्गीय सेठ बलदेव पचीसिया के वंशज देवांश और वसुधा पचीसिया का अभिनंदन किया गया। वर्ष 1939-40 में दान की गई 1945 बीघा भूमि और पीढ़ियों से चली आ रही गौसेवा की परंपरा इस आयोजन के केंद्र में रही।
श्री गौशाला नोहर में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान पचीसिया परिवार के सदस्य (बाएं से दाएं: राजकुमार पचीसिया, विशेष पचीसिया अपनी पुत्री के साथ, निधि पचीसिया, कुसुम पचीसिया, वसुधा पचीसिया और देवांश पचीसिया)।
नोहर, 19 अक्टूबर। भामाशाह स्वर्गीय सेठ बलदेव पचीसिया की गौसेवा और परोपकार की विरासत को आगे बढ़ा रहे उनके वंशज देवांश पचीसिया एवं उनकी धर्मपत्नी वसुधा पचीसिया का सोमवार को श्री गौशाला नोहर में अभिनंदन किया गया। गीता भवन में आयोजित कार्यक्रम में गौशाला परिवार ने राजस्थानी परंपरा के अनुसार पगड़ी पहनाकर, माल्यार्पण कर और स्मृति चिह्न भेंट कर दोनों का स्वागत एवं सम्मान किया। इस दौरान पचीसिया परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही गौसेवा के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्मीयता की परंपरा को याद किया गया।
कार्यक्रम के दौरान देवांश पचीसिया सहित परिवार के सदस्यों ने श्री गौशाला नोहर का भ्रमण कर वहां की व्यवस्थाओं, गतिविधियों और गौवंश की देखभाल से जुड़े कार्यों का अवलोकन किया। परिवार के सदस्यों ने गौशाला में संचालित व्यवस्थाओं की जानकारी भी ली।
श्री गौशाला नोहर के इतिहास में स्वर्गीय सेठ बलदेव पचीसिया का योगदान विशेष महत्व रखता है। वर्ष 1939-40 में उन्होंने श्री गौशाला नोहर (बीहड़ वाली) को 1945 बीघा भूमि दान की थी। उनका यह योगदान गौसेवा, गौवंश संरक्षण और सामाजिक परोपकार के प्रति उनकी उदार सोच का प्रतीक है। भूमि दान से गौशाला की सेवा परंपरा को मजबूत आधार मिला।
सेठ बलदेव पचीसिया द्वारा स्थापित इस परंपरा को उनके पुत्र स्वर्गीय गोपीकिशन पचीसिया, श्यामसुंदर पचीसिया एवं अशोक पचीसिया ने आगे बढ़ाया। इसके बाद श्यामसुंदर पचीसिया के पुत्र विनय पचीसिया और अब उनके पुत्र देवांश पचीसिया के माध्यम से गौशाला के प्रति परिवार का स्नेह और जुड़ाव निरंतर कायम है।
सोमवार सुबह देवांश पचीसिया, वसुधा पचीसिया, राजकुमार पचीसिया बीकानेर, कुसुम पचीसिया, विशेष पचीसिया और निधि पचीसिया सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने गौशाला का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गौशाला की व्यवस्थाओं, गतिविधियों और गौवंश की देखभाल से संबंधित कार्यों का अवलोकन किया।
अभिनंदन कार्यक्रम में श्री गौशाला नोहर के अध्यक्ष राजेन्द्र थिरानी, सचिव आनन्द कन्दोई, राजकुमार रानियांवाला, एडवोकेट संतलाल तिवाड़ी, रामचंद्र पारीक, किशन चाचाण, सांवरमल हिसारिया, सचिन खोखा, मुकेश कुमार, श्रवण पारीक, नंदलाल पारीक और बुलीचंद सिंधी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पचीसिया परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही सेवा परंपरा का उल्लेख किया गया।
सेठ बलदेव पचीसिया द्वारा दशकों पहले किया गया 1945 बीघा भूमि का दान आज भी गौसेवा के क्षेत्र में प्रेरणास्रोत बना हुआ है। उनके वंशजों का श्री गौशाला नोहर से निरंतर जुड़ाव इस विरासत को आगे बढ़ाने की परंपरा को दर्शाता है। कार्यक्रम के दौरान देवांश पचीसिया और वसुधा पचीसिया का सम्मान करते हुए फोटो भी लिया गया।