शारदीय नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा समय
11 अक्टूबर से शुरू हो रहे 10 दिवसीय शारदीय नवरात्रि में द्विस्वभाव लग्न और अभिजीत मुहूर्त में घटस्थापना करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
टोंक। आश्विन शुक्ला प्रतिपदा 11 अक्टूबर रविवार को शारदीय नवरात्रा का शुभारंभ होगा। देवी का आह्वान और घट स्थापना के लिए देवी पुराण एवं तिथि तत्व में प्रातःकाल प्रतिपदा तिथि तथा द्विस्वभाव लग्न में घट स्थापना को श्रेष्ठ बताया गया है। वहीं चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को वर्जित माना गया है। इस बार नवरात्रा रविवार से शुरू हो रहे हैं और माता की सवारी गज यानी हाथी पर आना वैभव, सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यह संयोग गत पचास वर्षों में छठी बार बन रहा है।
मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि 11 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6.28 बजे होगा और एकम तिथि रात्रि 21.31 बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र रात्रि 22.32 बजे तक रहेगा, इसके बाद स्वाति नक्षत्र रहेगा। गोचर में चंद्रमा कन्या राशि में सुबह 10.04 बजे तक रहेगा, जिसके स्वामी बुध हैं। इसके बाद चंद्रमा तुला राशि में रहेगा, जिसके स्वामी शुक्र हैं। नक्षत्र स्वामी मंगल है।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि देवी पुराण में चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग, दोनों को वर्जित बताया गया है। देवी पुराण में द्विस्वभाव लग्न युक्त प्रातःकाल में देवी का आह्वान एवं घटस्थापना पूजन करने का विधान है। 11 अक्टूबर को चित्रा नक्षत्र रात्रि 10.32 बजे तक और वैधृति योग रात्रि 09.05 बजे तक रहेगा।
निर्णय सिंधु के अनुसार प्रतिपदा के दिन चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग या दोनों में से कोई एक भी सम्पूर्ण दिन व्याप्त रहे तो अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करनी चाहिए। चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग को घट स्थापना में त्याज्य बताया गया है, लेकिन इन दोनों के आदि के दो चरणों को त्याग कर घट स्थापना की अनुमति प्रदान की जाती है। चित्रा नक्षत्र के दो चरण सुबह 10.03 बजे समाप्त होंगे और वैधृति के दो चरण सुबह 09.33 बजे समाप्त होंगे। यदि सम्पूर्ण प्रतिपदा चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग से युक्त हो तो मध्यान्ह काल पूजन करना चाहिए।
घट स्थापना के लिए लाभ-अमृत का चौघड़िया सुबह 09.20 से 12.13 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11.50 से 12.37 बजे तक रहेगा। द्विस्वभाव लग्न युक्त धनु राशि दिन में 11.32 बजे से दोपहर 01.36 बजे तक रहेगी। घट स्थापना के लिए यह श्रेष्ठ समय बताया गया है।
चौघड़िया के अनुसार चर का समय सुबह 07.54 से 09.20 बजे तक, शुभ का समय दोपहर 01.40 से 03.06 बजे तक, शुभ-अमृत का समय सायंकाल 05.59 बजे से रात्रि 09.07 बजे तक और इसके बाद चर का समय रात्रि 10.40 बजे तक रहेगा।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रा 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक 10 दिन के होंगे। सप्तमी तिथि का नवरात्रा 17 अक्टूबर को सम्पूर्ण दिन और रात्रि को होगा। 18 रविवार को सप्तमी तिथि सुबह 08.28 बजे तक रहेगी, इसके बाद अष्टमी का शुभारंभ हो जाएगा। अष्टमी रात्रि को पूजने वाले इसी दिन पूजन करेंगे। 19 अक्टूबर सोमवार को अष्टमी सुबह 10.52 बजे तक रहेगी, इसके बाद नवमी होगी। अतः नवमी पूजन वाले इसी दिन पूजन करेंगे।
अमृत सिद्धि एवं स्वार्थ सिद्धि योग 14 अक्टूबर बुधवार को सुबह 06.30 से 15 अक्टूबर को सुबह 04.03 बजे तक रहेगा। स्वार्थ सिद्धि योग 18 अक्टूबर रविवार को 12.48 बजे से 19 अक्टूबर सुबह 06.31 बजे तक और 19 अक्टूबर को दोपहर 03.38 से 20 अक्टूबर सुबह 06.32 बजे तक रहेगा।
20 अक्टूबर मंगलवार को नवमी दिन में 12.50 बजे तक रहेगी, इसके बाद दशमी का शुभारंभ होगा। श्रवण नक्षत्र शाम को 06.02 बजे रहेगा। अतः इसी दिन महा नवमी, दशमी तिथि में शमी पूजन, अपराजित पूजन, जयन्ति ग्रहण और विजया दशमी पर्व दशहरा मनाया जाएगा।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि 20 अक्टूबर मंगलवार को श्रवण नक्षत्र युक्त दशमी में विजयदशमी पर्व दशहरा मनाया जाएगा। चौघड़िया के अनुसार सूर्योदय से चर का समय 09.22 से 10.47 बजे तक, लाभ-अमृत का समय 10.47 से दोपहर 01.36 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त 11.49 से 12.34 बजे तक, शुभ का समय दोपहर 03.01 से 04.26 बजे तक, लाभ का समय रात्रि 07.26 से 09.01 बजे तक और शुभ का समय रात्रि 10.36 से 12.12 बजे तक रहेगा।
इन मुहूर्त योग में वाहन, आभूषण, सफेद वस्त्रों की खरीद, व्यापार, मशीनरी आदि कार्यों का शुभारंभ करना सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त योग बताया गया है। शारदीय नवरात्रा की घट स्थापना से लेकर विजयदशमी तक तिथि, नक्षत्र, योग और मुहूर्त का यह क्रम इस वर्ष के नवरात्र पर्व के धार्मिक आयोजन में विशेष महत्व रखता है।