तस्वीर में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवीलाल मीणा सवाई माधोपुर के माउंट टाउन स्थित राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्यापिकाओं के आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का निरीक्षण करते हुए नजर आ रहे हैं।   

सवाई माधोपुर में छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवीलाल मीणा ने 27 अक्टूबर को औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अध्यापिकाओं को प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए आत्मरक्षा के तरीकों का विद्यालयों में नियमित अभ्यास कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं की सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण को एक बार की औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि हर 7 दिन में अभ्यास कराया जाए।

जिले में संचालित 10 पीएम श्री विद्यालयों की एक-एक महिला शिक्षक को आत्मरक्षा प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करने के उद्देश्य से राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय माउंट टाउन, सवाई माधोपुर में 6 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी देवीलाल मीणा ने प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचकर अध्यापिकाओं द्वारा किए जा रहे अभ्यास का निरीक्षण किया। इस दौरान सभी प्रतिभागी पूर्ण मनोयोग से प्रशिक्षण लेते मिले।

निरीक्षण के बाद सीडीईओ देवीलाल मीणा ने आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की पहली प्राथमिकता विद्यालयों में बच्चियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है। रास्ते में आने-जाने के दौरान मनचलों से अपनी रक्षा किस तरह की जाए, इसका हुनर छात्राओं को सिखाया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली शिक्षिकाएं अपने-अपने विद्यालयों में छात्राओं को नियमित रूप से आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दें।

उन्होंने निर्देश दिए कि छात्राओं को एक बार प्रशिक्षण देकर कार्यक्रम की इतिश्री नहीं की जाए, बल्कि प्रत्येक 7 दिन बाद उनका अभ्यास अनिवार्य रूप से कराया जाए। इससे मुश्किल परिस्थिति में फंसने पर बच्चियां अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकेंगी और आत्मरक्षा के लिए सीखे गए तरीकों का उपयोग कर पाएंगी।

सीडीईओ ने शिक्षिकाओं को छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में भी विस्तार से जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चियों को यह समझाया जाए कि गुड टच क्या है और बैड टच क्या है। यदि कोई शिक्षक या अन्य व्यक्ति छात्रा के साथ बैड टच करता है, तो छात्राएं इसकी शिकायत तुरंत अपने प्रधानाचार्य या उच्च अधिकारियों से करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्राओं को जागरूक करना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना ही सरकार और शिक्षा विभाग की मंशा है।

इस दौरान प्रशिक्षण प्रभारी हरिओम गौतम, एपीसी गीता जेलिया, अध्यापिका श्रीमती कल्पना शर्मा और प्रधानाचार्य एवं मास्टर ट्रेनर उपस्थित रहे।

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