करौली में विश्व आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस के अवसर पर बुधवार, 21 अक्टूबर को जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और जिला अस्पताल में जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम के तहत आयोजित इन गतिविधियों का उद्देश्य आयोडीन युक्त नमक के उपयोग को बढ़ावा देना रहा।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सतीश चंद मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के चिकित्सा संस्थानों में विशेष आयोजन किए गए। उन्होंने बताया कि आयोडीन की कमी से गलगंड, बौनापन, मानसिक मंदता, गर्भपात और नवजात में बौद्धिक अक्षमता जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इन समस्याओं की रोकथाम के लिए आयोडीन युक्त नमक का नियमित उपयोग आवश्यक है।

डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ डॉ. ओम प्रकाश महावर ने बताया कि जिले में 90 प्रतिशत से अधिक घरों में 15 पीपीएम से अधिक आयोडीन युक्त नमक का उपयोग सुनिश्चित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने आमजन से अपील की कि नमक खरीदते समय केवल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) का चिह्न लगा पैकेट बंद आयोडीन युक्त नमक ही खरीदें। नमक को ढक्कन बंद डिब्बे में रखें और गर्मी तथा नमी से बचाएं। इसके साथ ही खाना पकने के अंत में नमक डालने और खुले नमक तथा रॉक साल्ट का उपयोग नहीं करने की सलाह दी।

जिले में आयोजित इन जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों की रोकथाम और सुरक्षित नमक के उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 90 प्रतिशत से अधिक घरों तक आयोडीन युक्त नमक के नियमित उपयोग का संदेश पहुंचाना कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।

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