पीले रंग का सूर्य मंदिर परिसर और उसके मुख्य द्वार के पास खड़े दो व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं।

बिहार के नालंदा जिले के हिलसा स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर में छठ महापर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विशाल सरोवर के पूर्वी किनारे स्थित यह मंदिर चैत और कार्तिक छठ के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। यहां बिहार के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में छठ व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र राजा साम्ब ने कराई थी। यही वजह है कि मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व विशेष माना जाता है।

हिलसा नगर परिषद प्रशासन की ओर से दीपावली के साथ ही छठ महापर्व की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं। हालांकि, फिलहाल मंदिर परिसर और सरोवर के घाटों की साफ-सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है। पहले सरोवर के केवल पूर्वी हिस्से में पत्थर की सीढ़ियां बनी थीं, लेकिन अब दक्षिण दिशा के कुछ हिस्से को छोड़कर चारों तरफ पक्की सीढ़ियों का निर्माण हो चुका है। छठ महापर्व के दौरान यहां चार दिनों तक मेला लगता है और पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में बदल जाता है।

हिलसा सूर्य मंदिर में चैत और कार्तिक छठ के अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं के अलावा पटना, बिहारशरीफ, राजगीर, गया और जहानाबाद सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में व्रती पहुंचते हैं। मंदिर के पुजारी अंजनी पांडेय के अनुसार, यह मंदिर कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के लिए राजा साम्ब ने बड़गांव सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। स्वस्थ होने के बाद पुरोहितों की सलाह पर उन्होंने विभिन्न स्थानों पर सूर्य मंदिरों का निर्माण कराया था, जिनमें हिलसा का सूर्य मंदिर भी शामिल बताया जाता है।

मंदिर के गर्भगृह में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान भास्कर सारथी अरुण देव के साथ विराजमान हैं। इसके अलावा मंदिर में भगवान विष्णु, शिव, माता पार्वती, गणेश और हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं, जो काले पत्थरों से निर्मित हैं। मंदिर के सामने स्थित विशाल सरोवर में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करने की विशेष मान्यता है। श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ति और रोगों से मुक्ति की कामना लेकर पहुंचते हैं।

मंदिर में वर्षभर प्रत्येक रविवार को विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। पुजारी सौरभ पांडेय के अनुसार, इस दौरान गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मार्गशीर्ष मास के अगहनी रविवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। इसी दिन से रविवार व्रत की शुरुआत होती है, जिसकी पूर्णाहुति वैशाख मास में होती है। इस व्रत के दौरान श्रद्धालु नमक का सेवन भी नहीं करते। इसके अलावा कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित दोषों के निवारण के लिए भी यहां विशेष पूजा किए जाने की मान्यता है।

समय के साथ मंदिर की स्थिति जर्जर हो गई थी। पुजारी अंजनी पांडेय बताते हैं कि 1990 के दशक में हिलसा के व्यवसायी एवं इंजीनियर हरिनंदन प्रसाद ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। मंदिर परिसर में शिव, ग्राम देवी, विश्वकर्मा, नवग्रह, चित्रगुप्त, संतोषी माता, गायत्री और हनुमान सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं।

इस मंदिर में पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार और पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा भी पहुंचकर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना कर चुके हैं।

छठ महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर नगर परिषद प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम किए जाएंगे। मुख्य पार्षद धनंजय कुमार ने बताया कि व्रतियों के लिए साफ-सफाई, मेडिकल कैंप, चेंजिंग रूम, चलंत शौचालय, स्नानघर, शुद्ध पेयजल, रोशनी और वाच टावर की व्यवस्था की जाएगी। इन व्यवस्थाओं को लेकर बैठक हो चुकी है और योजना भी तैयार कर ली गई है।

सरोवर में श्रद्धालुओं को गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए बांस-बल्ले से बैरिकेडिंग कराई जाएगी। अर्घ्य के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर नाव के साथ तैराक भी तैनात रहेंगे। वहीं, मेले में सीसी कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी। इस तरह राजा साम्ब से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं वाले हिलसा सूर्य मंदिर में छठ महापर्व के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना के बीच प्रशासन ने सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर तैयारियां निर्धारित की हैं।