भगवान धन्वंतरि का चित्रण और धनतेरस 2026 कथा का शीर्षक, जो समुद्र मंथन और बर्तन खरीदने की परंपरा को दर्शाता है।

हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पावन पर्व मनाया जाता है। इसी विशेष त्योहार के साथ दीपावली के महापर्व की शुरुआत हो जाती है। धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और कुबेर देवता के साथ-साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विशेष विधान है। इस दिन नए बर्तन, सोना और चांदी जैसी शुभ वस्तुएं खरीदने की परंपरा भी चली आ रही है। आइए जानते हैं कि इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे समुद्र मंथन की क्या कथा है।

क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?

पौराणिक मान्यताओं और समुद्र मंथन की कथा के अनुसार, भगवान धन्वंतरि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर समुद्र मंथन के दौरान अपने हाथों में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। यही मुख्य कारण है कि हर साल कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि यानी दिवाली से ठीक दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। चूंकि भगवान धन्वंतरि इस दिन हाथ में कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा की शुरुआत हुई और इसे अत्यंत शुभ माना जाने लगा।

भगवान विष्णु का अवतार और चिकित्सा विज्ञान के प्रसारक

धन्वंतरि भगवान को श्रीहरि विष्णु का ही अंश माना जाता है, इसलिए उनकी छवि और स्वरूप भगवान विष्णु से काफी मिलते-जुलते हैं। भगवान धन्वंतरि के हाथों में अमृत कलश और औषधि सुशोभित रहती है। ऐसी मान्यता है कि इन्होंने ही पूरी दुनिया में चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद) का प्रसार किया था। इसके अलावा, भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के ठीक दो दिन बाद धन की देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, जिसके चलते दो दिन बाद दिवाली के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है।

बर्तन और सोना खरीदने की परंपरा का इतिहास

समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि जब प्रकट हुए थे, तो उनके हाथों में स्वर्ण का कलश था। यही वजह है कि धनतेरस के दिन सोना खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही, इस दिन मूल रूप से नए बर्तन खरीदने की भी परंपरा चली आ रही है। प्राचीन समय में लोग विशेष तौर पर पूजा-पाठ के कार्यों में उपयोग होने वाले कलश और घड़े आदि खरीदते थे। इन बर्तनों का उपयोग घर में सकारात्मकता बढ़ाने और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता था। समय के साथ यह परंपरा आज भी कायम है और लोग धनतेरस के शुभ अवसर पर अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार बर्तन, सोना और चांदी खरीदते हैं।