केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बिहार की शिक्षा व्यवस्था पर बयान, NEP पर दी सलाह
केंद्रीय मंत्री ने पुरानी सरकारों की राजनीति पर सवाल उठाए और अभिभावकों से बच्चों पर करियर न थोपने की अपील की।
पटना में आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में प्रह्लाद जोशी और सम्राट चौधरी दीप प्रज्वलित करते हुए।
बिहार की शिक्षा व्यवस्था में जाति और ‘डिवाइड एंड रूल’ की राजनीति ने नुकसान पहुंचाया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में यह आरोप लगाया। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को सामने रखते हुए कहा कि शिक्षा का लक्ष्य केवल रटकर परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों में सोचने-समझने की क्षमता, रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति विकसित करना भी जरूरी है।
पटना के बापू सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरण समारोह में जोशी ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और उसमें हो रहे बदलावों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में किए गए प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। उनके बयान ने बिहार में शिक्षा व्यवस्था और जाति आधारित राजनीति को लेकर चर्चा को फिर सामने ला दिया।
रटकर परीक्षा पास करना नहीं, नए विचार पैदा करना है लक्ष्य
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि पढ़ाई का उद्देश्य केवल रटकर परीक्षा पास करना या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों की सोचने-समझने की क्षमता, रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति का विकास हो।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है। ऐसे समय में एक नया विचार भी पूरे उद्योग को जन्म दे सकता है। इसलिए बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय सवाल पूछने, नए प्रयोग करने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए।
38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी पर जताई खुशी
समारोह में आयोजित राज्यस्तरीय सेवा, चित्र एवं भाषण प्रतियोगिता में बिहार के 38 जिलों के 95,195 स्कूलों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए प्रह्लाद जोशी ने प्रसन्नता जताई।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं में बच्चों को मिलने वाले पुरस्कार केवल इनाम नहीं, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता की पहचान हैं। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, ऐसी गतिविधियां बच्चों को अपनी बात रखने, रचनात्मकता दिखाने और नए विषयों पर सोचने का अवसर देती हैं। पढ़ाई के साथ इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मददगार हो सकती है।
2047 के विकसित भारत की जिम्मेदारी आज के युवाओं पर
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि वर्ष 2047 में जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश के विकास की जिम्मेदारी आज के युवाओं के कंधों पर होगी। उन्होंने युवाओं की प्रतिभा और नए विचारों को विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए शिक्षा की भूमिका पर जोर दिया।
उनके मुताबिक, विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना जरूरी है। इसके लिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता है, जिसमें ज्ञान के साथ रचनात्मकता विकसित करने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के अवसर भी मिलें।
अभिभावकों से अपील, बच्चों पर अपनी पसंद का करियर न थोपें
कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों से बच्चों की वास्तविक रुचि और प्रतिभा पहचानने की अपील की। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों पर अपनी पसंद का करियर थोपने के बजाय उन्हें उस क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर देना चाहिए, जिसमें उनकी दिलचस्पी हो।
उन्होंने संदेश दिया कि हर बच्चे की क्षमता और रुचि अलग होती है। ऐसे में उसे अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ने का मौका देना जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करने या नौकरी पाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बच्चों को सोचने, सीखने और अपनी पहचान बनाने में सक्षम करना भी होना चाहिए।