भागलपुर शिक्षा विभाग में 1 करोड़ का फर्जीवाड़ा, HRMS पोर्टल से सेंधमारी
संविदा ऑपरेटर ने 'तनुश्री' नाम से फर्जी आईडी बनाकर की करोड़ों की निकासी, पटना एचआरएमएस टीम की जांच के बाद साइबर थाने में FIR दर्ज।
तस्वीर में शिक्षा विभाग भागलपुर, एचआरएमएस पोर्टल, फर्जी दस्तावेज और पुलिस जांच का दृश्य प्रदर्शित है।
भागलपुर शिक्षा विभाग में डिजिटल व्यवस्था और पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर सरकारी खजाने में सेंधमारी का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग की स्थापना शाखा में वर्ष 2019 से संविदा पर कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटर ने 'तनुश्री' नाम से एक फर्जी 'विशिष्ट शिक्षिका' की आईडी तैयार कर करीब एक करोड़ रुपये की राशि का वारा-न्यारा कर दिया।
मामले का खुलासा पटना स्थित मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) की केंद्रीय जांच टीम द्वारा डिजिटल डेटा के सत्यापन के दौरान हुआ। टीम की जांच में संदिग्ध आईडी पकड़ में आई। प्राथमिक जांच में विभागीय संविदा ऑपरेटर अविनाश राज की सीधी संलिप्तता सामने आई है। अविनाश राज सूर्यलोक कॉलोनी, थाना बबरगंज, भागलपुर में रहता है। उसका पैतृक गांव बांका जिले के रजौन पुनसिया में है। इस मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ- स्थापना) शशि चंदन चौधरी ने आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की विधिवत प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विभागीय पड़ताल में सामने आया कि यह फर्जी शिक्षक आईडी अप्रैल 2025 में बनाई गई थी। आईडी को सिस्टम में वैध दिखाने के लिए फर्जी पैन कार्ड, मनगढ़ंत स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) और अन्य जाली दस्तावेज अपलोड किए गए थे। जिस बैंक खाते को वेतन भुगतान के लिए लिंक किया गया, वह एक जनधन खाता बताया जा रहा है। शुरुआत में शक से बचने के लिए अप्रैल से जून तक इस खाते में 30 हजार से लेकर 50 हजार रुपये तक के कई छोटे लेनदेन वेतन और एरियर के नाम पर किए गए।
ऑपरेटर अविनाश राज की संदिग्ध कार्यशैली को देखते हुए शिक्षा विभाग ने इसी वर्ष जून महीने में उसकी संविदा समाप्त कर उसे कार्य से हटा दिया था। इसके बावजूद फर्जी आईडी से संदिग्ध वित्तीय निकासी का सिलसिला नहीं रुका। प्रारंभिक वित्तीय जांच के अनुसार, पिछले दो महीनों में इस फर्जी आईडी के माध्यम से दो अलग-अलग मौकों पर करीब 27 लाख रुपये और 40 लाख रुपये, कुल 67 लाख रुपये का भारी लेनदेन किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी राशि को पहले हरियाणा के फरीदाबाद स्थित एक बैंक खाते में भेजा गया और इसके बाद वहां से भागलपुर के बैंक खाते में रूट किया गया। सूत्रों के मुताबिक, आरोपी अविनाश के परिवार के कुछ सदस्य फरीदाबाद में रहते हैं, जहां से इस मनी ट्रेल को अंजाम दिया गया।
इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के ऑनलाइन वेतन भुगतान सिस्टम एचआरएमएस पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय जानकारों के अनुसार, पोर्टल पर शिक्षकों के नगर परिवहन भत्ता (सीटीए) और मकान किराया भत्ता (एचआरए) को अपडेट करने के लिए 'एडिट' का विकल्प दिया गया है।
आरोप है कि ऑपरेटर अविनाश ने इसी एडिट टूल की कमजोरियों का फायदा उठाकर फर्जी डेटा फीड किया और बिना किसी रोक-टोक के लाखों रुपये की निकासी को मंजूरी दिलाता रहा। अब जांच इस बिंदु पर भी केंद्रित है कि यह मामला केवल 'तनुश्री' नाम की एक फर्जी आईडी तक सीमित था या सिस्टम में ऐसी अन्य फर्जी आईडी भी सक्रिय की गई थीं। साइबर थाना पुलिस और विभागीय ऑडिट टीम पूरे डिजिटल लॉग के साथ संलिप्त अधिकारियों और कर्मियों की भूमिका की गहन जांच में जुट गई है। Jagran