दिल्ली विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार और लाल ईंटों की बाहरी दीवार।

डिजिटल एजुकेशन के बढ़ते दायरे के बीच भारतीय भाषाओं के सामने मौजूद संभावनाओं और चुनौतियों पर दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स (DCAC) में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। “डिजिटल जगत में भारतीय भाषाएं: नूतन विमर्श का निर्माण” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में देश के अलग-अलग यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शिक्षाविदों, रिसर्चरस और भाषा विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

सेमिनार के उद्घाटन सत्र में DCAC के कार्यवाहक प्राचार्य आचार्य श्रीकांत पाण्डेय ने स्वागत संबोधन दिया। मुख्य अतिथि डॉ. उमाशंकर पचौरी, सूचना आयुक्त, राज्य सूचना आयोग, मध्य प्रदेश ने भारतीय भाषाओं की मौजूदा प्रासंगिकता पर बात की। उद्घाटन सत्र का फोकस “डिजिटल मानविकी एवं भारतीय भाषाएं” रहा।

पहले दिन “भारतीय ज्ञान परंपरा और स्वदेशी भाषा दृष्टि” विषय पर सत्र आयोजित किया गया। इसमें अतुल कोठारी ने बीज वक्तव्य दिया, जबकि राजधानी कॉलेज के प्राचार्य आचार्य दर्शन पाण्डेय ने अध्यक्षता की। इसके बाद ‘अनुवाद, स्थानीयकरण एवं बहुभाषिक प्रौद्योगिकियां' विषय पर चर्चा हुई। JNU के संस्कृत विभाग के आचार्य गिरीश नाथ झा ने बीज वक्तव्य दिया।

तकनीकी सत्रों में डिजिटल मानविकी, भारतीय मुद्रा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भाषाई टैकनोलजी जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। सोशल मीडिया, डिजिटल कम्युनिकेशन, डिजिटल प्रिंटिंग और नॉलेज इकोसिस्टम को लेकर भी शिक्षा प्रेमियों ने अपने विचार रखे। इन सत्रों में भाषा और टैकनोलजी के बीच बढ़ते संबंधों और भारतीय समुद्री लहरों के लिए नए अवसरों पर चर्चा हुई।

सेमिनार के दूसरे दिन चर्चा का एक प्रमुख विषय भाषा शिक्षण और शिक्षाशास्त्र रहा। शिक्षा साधक ने डिजिटल युग भाषा में शिष्या के अनमोल विचार और तकनीकी नवाचार की भूमिका पर विचार किया। साथ ही अनुवाद, स्थानीयकरण और बहुभाषी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारतीय भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

दूसरे दिन ‘अंग्रेजी, भारतीय भाषाएं और डिजिटल सार्वजनिक वृत्त' विषय पर डॉ. साकेत बहुगुणा, केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय ने बीज वक्तव्य दिया। मीडिया एंड कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की अध्यक्ष और IIMC की हिंदी पत्रकारिता की पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. रचना शर्मा ने सेशन की अध्यक्षता की। सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशन के जरिए भारतीय भाषाओं में नए विमर्श के उभरने पर भी चर्चा हुई।

सेमिनार में वक्ताओं ने भारतीय भाषाओं को डिजिटल शिक्षा, शोध और ज्ञान-निर्माण से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। चर्चा का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि डिजिटल युग में भारतीय भाषाएं केवल कम्युनिकेशन का माध्यम न रहकर शिक्षा, रिसर्चर, ज्ञान के प्रसार और नए एकेडमी डिसकोर्स का महत्वपूर्ण हिस्सा कैसे बन सकती हैं।

दो दिवसीय सेमिनार का समापन “डिजिटल युग में भारतीय भाषाओं का भविष्य” विषय पर हुआ। डॉ. अभिजीत सिंह ने सेमिनार की रिपोर्ट और इसके प्रमुख निष्कर्ष प्रस्तुत किए। समापन सत्र में प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट भी दिए गए। इस दौरान कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग की निदेशक आचार्य पायल मागो, NDTF के अध्यक्ष आचार्य ए.के. भागी और अन्य अतिथि मौजूद रहे।