तमिलनाडु में दीक्षांत समारोह पर बवाल: गीतों के क्रम और डिग्री वितरण को लेकर मंत्री-MLA का बहिष्कार|
मनोन्मनीयम सुंदरनार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में गीतों के क्रम और डिग्री वितरण को लेकर हुए विवाद के बाद मंत्री और विधायकों ने किया बहिष्कार।
मनोन्मनीयम सुंदरनार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह के दौरान मंच पर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा एक छात्रा को डिग्री प्रदान किए जाने का दृश्य।
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय का 33वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को दोहरे विवादों के साए में घिरा नजर आया। कार्यक्रम शुरू होने से ठीक पहले गीतों के निर्धारित क्रम और डिग्री वितरण को लेकर हुए विरोध के कारण शैक्षणिक माहौल में भारी तनाव देखने को मिला। इस दौरान प्रोटोकॉल विवाद के चलते राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री और स्थानीय विधायकों ने समारोह का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर दिया, जिससे यह आयोजन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया।
विवाद की मुख्य जड़ समारोह के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले गीतों का क्रम रहा। आधिकारिक कार्यक्रम के तहत सबसे पहले 'वंदे मातरम्' प्रस्तुत किया गया, जबकि राष्ट्रगान के बाद राज्य वंदना गीत 'तमिल थाई वाऴ्थु' को तीसरे क्रम पर रखा गया था। इस व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उच्च शिक्षा मंत्री पी. विश्वनाथन ने दीक्षांत समारोह में शामिल होने से इनकार कर दिया। उनके साथ तिरुनेलवेली से टीवीके विधायक मुरुगन और कडायनल्लूर से विधायक राजेंद्रन ने भी इस समारोह का बहिष्कार किया। राजनीतिक दलों और विपक्षी नेताओं का मानना था कि राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखना तमिल संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतिकूल है।
इसके साथ ही, समारोह के दौरान डिग्री वितरण की प्रक्रिया में अंतिम समय में किए गए बदलाव ने छात्रों और उनके परिजनों में भारी नाराजगी पैदा कर दी। विश्वविद्यालय ने पहले घोषणा की थी कि मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर 871 से अधिक विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूप से डिग्रियां प्रदान करेंगे। हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने से कुछ समय पहले यह संशोधित सूचना जारी की गई कि राज्यपाल केवल 113 स्वर्ण पदक विजेता छात्रों को ही सीधे डिग्री वितरित करेंगे, जबकि अन्य शोधार्थियों और छात्रों को अलग प्रक्रिया के तहत प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। इस अचानक हुए बदलाव से उन पीएचडी शोधार्थियों और छात्रों को गहरी निराशा हुई जो सुबह से अपनी डिग्रियां प्राप्त करने की उम्मीद लेकर पहुंचे थे।
छात्रों के बढ़ते विरोध और हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्यपाल के बीच विचार-विमर्श किया गया, जिसके बाद निर्णय को संशोधित करते हुए राज्यपाल ने सभी योग्य शोधार्थियों को व्यक्तिगत रूप से डिग्रियां प्रदान कीं। हालांकि इसके बावजूद, गीतों के क्रम को लेकर उपजा प्रोटोकॉल विवाद और मंत्रियों का बहिष्कार इस पूरे आयोजन पर हावी रहा। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिससे आने वाले दिनों में शैक्षणिक संस्थानों में प्रोटोकॉल और राज्य-केंद्र के समन्वय को लेकर बहस और तेज होने की पूरी संभावना है।