मक्का की कटाई तेज, लेकिन घटा उत्पादन और बढ़ा खर्च; किसानों के सामने आर्थिक संकट
उत्पादन घटने और लागत बढ़ने से खरीफ सीजन की आर्थिक योजना प्रभावित होने की आशंका, किसानों ने शासन से राहत की मांग की।
शिरपुर तालुका के त-हाडी सहित आसपास के क्षेत्रों में मक्का की कटाई का काम तेज हो गया है। खेतों में कटाई और मड़ाई की गतिविधियां बढ़ने के साथ किसान फसल को घर लाने में जुटे हैं, लेकिन अपेक्षा के अनुरूप उत्पादन नहीं मिलने से उनकी चिंता बढ़ गई है। एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कम उत्पादन के कारण मक्का उत्पादक किसानों का आर्थिक गणित बिगड़ने की आशंका है।a
मक्का इस क्षेत्र के कई किसानों के लिए दूसरी प्रमुख फसल मानी जाती है। खरीफ सीजन में किसान बड़े पैमाने पर मक्का की खेती को प्राथमिकता देते हैं। अन्य फसलों की तुलना में मक्का से बेहतर आमदनी मिलने की उम्मीद में किसान बीज, खाद और कीटनाशकों पर खर्च करते हैं। हालांकि, जब फसल तैयार होकर उत्पादन देने की स्थिति में पहुंचती है और अपेक्षित पैदावार नहीं मिलती, तो पूरे सीजन का आर्थिक नियोजन प्रभावित हो जाता है। फिलहाल कुछ मक्का उत्पादक किसान इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
इस वर्ष मक्का की बुवाई से लेकर कटाई तक किसानों को कई तरह के खर्च उठाने पड़ रहे हैं। बीज, खाद, दवाइयों, खेत की जुताई और अन्य कृषि कार्यों के साथ मजदूरी, कटाई तथा मड़ाई पर भी बड़ी राशि खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में यदि वास्तविक उत्पादन कम मिलता है, तो किसानों के लिए खेती पर किए गए खर्च की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है।
वर्तमान में क्षेत्र के कई खेतों में मक्का की कटाई जारी है। कुछ स्थानों पर मशीनों की मदद से मक्का को अलग करने का काम भी किया जा रहा है। खेतों में मक्का के ढेर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उत्पादन और खेती की लागत के बीच तालमेल बैठाने में किसानों को परेशानी हो रही है।
मक्का की खेती पर हुआ कुल खर्च, प्राप्त होने वाला उत्पादन और बाजार में मिलने वाला भाव ही किसानों के मुनाफे का गणित तय करेगा। यदि कम उत्पादन और अधिक लागत की स्थिति बनी रहती है, तो किसानों के हाथ में अपेक्षित आमदनी बच पाना मुश्किल होगा। इससे पूरे खरीफ सीजन की आर्थिक योजना प्रभावित होने की आशंका है।
मक्का उत्पादक किसानों को राहत देने के लिए शासन को फसल की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित उपाय करने चाहिए। किसानों की ओर से भी ऐसी अपेक्षा व्यक्त की जा रही है।
फिलहाल खेतों में मक्का की कटाई का सिलसिला तेज है, लेकिन कम पैदावार और बढ़ते खर्च ने किसानों के सामने आर्थिक संकट की आशंका खड़ी कर दी है। ऐसे में मक्का की फसल से अपेक्षित आमदनी होगी या नहीं और खेती पर किया गया खर्च निकल पाएगा या नहीं, यह सवाल शिरपुर तालुका के मक्का उत्पादक किसानों के सामने बना हुआ है।